अनन्तराम चौबे अनन्त – पति-पत्नी – साप्ताहिक प्रतियोगिता

पति पत्नी साथ में दोनो हो सुख मय जीवन चलता है ।

दोनों में से एक न हो तो बस जीवन नीरस लगता है ।

अच्छी बुरी जो बात हो एक दूजे से आपस में कहते हैं

संकोच की कोई दीवार न रहती आपस में न गोपनीयता रखते है ।

तन मन धन से समर्पित रहते पर्दे की कोई बात न रखते ।

आपस के विश्वास से मिलकर सुख मय जीवन को हैं रखते ।

शक की बात मन में भर जाये दोनों का जीवन दूभर ह़ो जाता है ।

शक से बड़ा कोई दुश्मन नहीं है दोनों की सुख शांति सब छीन लेता है ।

पति पत्नी के सुख मय जीवन में अचानक कोई एक बिछड़ जाता है ।

जीवन में घोर अंधेरा छा जाता है पत्नी के बिन पति दुखी रहता है ।

माता पिता जब ये बनते हैं बच्चों में जीवन बट जाता है ।

माता पिता बनने का दोनो को जीवन में एहसास होता है ।

बच्चों की मोह माया में जीवन जब आगे बढ़ता है ।

पति पत्नी से माता पिता का परिवार में रूतबा बढ़ जाता है ।

बचपन से ही बच्चों की हर ख्वाहिस पूरी करते हैं ।

बच्चों की खुशी में माता पिता भी उनके साथ में खुश रहते हैं ।

बच्चे जैसे जैसे बढ़े होते हैं खर्चे उनके बढ़ते जाते हैं

स्कूलों में प्रवेश पाने को हर एक जतन लगाते हैं ।

पति पत्नी और माता पिता होने का पूरा फर्ज निभाते हैं ।

पति पत्नी के अपने फर्ज को जीवन भर साथ निभाते हैं ।