अफसरों में वर्चस्व की जंग

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राज्य में पुलिस कमिशनरी गठन का प्रस्ताव क्या दिया, प्रदेश के आइएएस और आइपीएस अधिकारियों के बीच तनातनी बढ़ गई. इससे आइएएस और अधीनस्थ राजस्व अधिकारियों के हाथों से मजिस्ट्रेटी शक्ति छिन जाएगी. यह ताकत पुलिस अधिकारियों के पास चली जाएगी.

कानून-व्यवस्था के लेकर 26 मार्च की बैठक में चौहान ने पुलिस कमिशनरी की नई व्यवस्था का प्रस्ताव दिया और इसे इंदौर और भोपाल से शुरू करने की बात की. उनका तर्क था कि प्रशासनिक अधिकारियों पर राजस्व से जुड़े कार्यों का भारी बोझ है. मुख्य सचिव बी.पी. सिंह ने सुझाव दिया कि इस पर विचार-विमर्श की आवश्यकता है. लेकिन चैहान ने कहा कि वे मन बना चुके हैं.

दो दिनों बाद मुख्यमंत्री बदले हुए थे. भोपाल में 29 मार्च को ‘इंडिया टुडे स्टेट ऑफ द स्टेट कॉन्क्लेव’ में उन्होंने कहा, ”कानून-व्यवस्था को सुधारने के लिए जल्दी ही कुछ कदम उठाएंगे.”

इस मामले में मध्य प्रदेश आइएएस एसोसिएशन की बैठक हुई. प्रदेश के आइपीएस एसोसिएशन ने भी बैठक की और उसके अध्यक्ष, स्पेशल डीजी संजय राणा ने सरकार की पहल का समर्थन किया.

इस गतिरोध के पीछे प्रस्तावित लोक सुरक्षा नियमन बिल का वह ड्राक्रट भी है जो किराएदारों, होटल, मॉल में सीसीटीवी कैमरे और इमारतों की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों के लिए है. आइएएस अधिकारियों को लगता है कि कमिशनरी व्यवस्था और प्रस्तावित कानून उनका अधिकार क्षेत्र कम कर देगा.

राज्य में विधानसभा के चुनाव सिर पर हैं और चौहान नई-नई घोषणाएं कर रहे हैं. वैसे, चौहान दो बार पहले भी चुनावों से ऐन पहले ऐसी घोषणाएं कर चुके हैं.