अब बिहार में OBC को भी UPSC प्री की परीक्षा पास करने पर मिलेगा 1 लाख

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बिहार में एनडीए सरकार आजकल अपना वोट बैंक मजबूत करने में जोरशोर से जुटी हुई है. दलितों में नाराजगी को देखते हुए नीतीश सरकार ने पहले सिर्फ एससी/एसटी के यूपीएससी और बीपीएससी की प्रारंभिक परीक्षा (पीटी परीक्षा) पास करने पर प्रोत्साहन राशि देने का ऐलान किया था. लेकिन अब सरकार ने पिछड़ा और अति पिछड़ा वर्ग के अभ्यर्थियों को भी इसमें शामिल करने का फैसला किया है.

इसके तहत सूबे में एससी/एसटी की तरह पिछड़ा और अति पिछड़ा वर्ग के अभ्यर्थियों को यूपीएससी की पीटी पास करने पर एक लाख रुपये और बीपीएससी की पीटी परीक्षा पास करने पर 50 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि राज्य सरकार देगी.

अब केवल सामान्य वर्ग के अभ्यर्थी ही नीतीश सरकार की इस प्रोत्साहन राशि से वंचित रहेंगे. पिछड़े वर्ग के अभ्यर्थियों ने सरकार के इस कदम का स्वागत किया है. पटना में इन प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों ने कहा कि नीतीश सरकार का यह बेहद सराहनीय कदम है.

बीपीएससी की तैयारी कर रहे विशाल कुमार, आशीष रंजन, रविन्द्र कुमार और श्रवण कुमार का कहना है कि सरकार को पीटी परीक्षा के तुरंत बाद यह राशि छात्रों को उपलब्ध करना चाहिए, ताकि वो समय पर कोचिंग कर सकें. इनका कहना है कि पिछड़ा और अति पिछड़ा वर्ग के बहुत से छात्र पैसे के अभाव में पीटी पास करने के बाद मेन्स की तैयारी ठीक से नहीं कर पाते हैं.

पिछले हफ्ते राज्य कैबिनेट ने सबसे पहले एससी/एसटी के छात्रों के लिए प्रोत्साहन राशि देने का फैसला किया था. तब कहा जा रहा था कि दलित नाराज हैं और उनको खुश करने के लिए सरकार ने यह फैसला लिया है. इसके ठीक एक हफ्ते बाद सरकार को यही फैसला पिछड़ा और अति पिछडा वर्ग के लिए भी लेना पड़ा.

सरकार के पिछड़ा और अति पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के सचिव प्रेम सिंह मीणा का कहना है कि पैसे के अभाव में इन वर्गों के छात्र ठीक से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी नहीं कर पाते थे. वो बेहतर कोचिंग नहीं ले पाते थे. अब राज्य सरकार से मिलने वाले पैसों से वो कोचिंग करके बेहतरीन तैयारी कर सकते हैं.

इस फैसले पर छात्रों ने खुश जाहिर की है, लेकिन उन्हें डर है कि सरकार का यह फैसला सिर्फ कागज पर ही न रह जाए. इनकी ये भी मांग है कि पैसे समय पर मिलें, ताकि वो कोचिंग समय पर ले सकें. हालांकि सरकार के इस फैसले से आर्थिक रूप से पिछड़े सामान्य वर्ग के छात्रों की भी आस जगी है कि शायद सरकार उनकी भी सुध ले.


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