अशोक योगी – जवान/फौजी/सैनिक – साप्ताहिक प्रतियोगिता

ऐ मेरे हिन्द के वीर जवान”

ऐ मेरे हिन्द के वीर जवान
तुम्हे मेरा बारम्बार प्रणाम।

प्रहरी बन खड़ा हिमालय की चोटी पर
तू हिम तूफानों से टकराता है
राजपुताना की रजो धरा पर
तू उष्ण लपटों के थपेड़े खाता है
नहीं रण में पीठ दिखाता है
तू सीने पर गोली खाता है
एकपल .. में ..मिटा देता .. है
तू दुश्मन का नामोनिशान..

ऐ मेरे हिन्द के वीर जवान
तुम्हे मेरा बारम्बार प्रणाम।

सागर की छाती पर चलता है जब
तू दुश्मन भी थर्राता हैं
प्रतिकूल परिस्थिति में भी
नहीं कभी घबराता है
उड़ता है नील गगन में जब
तू तो नभ भी क़दमों में झुक जाता है
जल थल नभ में विचरण
करता है तू एक समान..

ऐ मेरे हिन्द के वीर जवान
तुम्हे मेरा बारम्बार प्रणाम।

तेरे ही कारण यह गुलिस्तां आबाद है
ज़ोर-ए-बाजूएं तेरी यह मुल्क आज़ाद है
दुश्मन के लिए तू साक्षात यमराज है
तेरी अदम्य शक्ति पर मुल्क को नाज़ है
कंठ में तेरे गूंजता जयहिंद का नाद है
तू ही हिन्द का असली सरताज है
तू ही है हिंदुस्तान की असली
आन…..बान…..और शान….
ऐ मेरे हिन्द के वीर जवान
तुम्हे मेरा बारम्बार प्रणाम ।