आसाराम के 2 राजदारों को कार्ट ने किया बरी, जानें क्‍या थे इनपर आरोप

आध्यात्मिक गुरु आसाराम को जोधपुर की कोर्ट ने नाबालिग लड़की से रेप केस में दोषी ठहराया है. इस केस में आसाराम के साथ ही उसकी राजदार शिल्पी और शरतचंद्र भी दोषी ठहराए गए हैं. वहीं, प्रमुख सेवादार शिवा और रसोइया प्रकाश को कोर्ट ने बरी कर दिया है. बरी किए गए सेवादार और रसोइया पर भी पीड़िता ने गंभीर आरोप लगाए थे. जानें सेवादार शिवा और रसोइया प्रकाश पर क्‍या थे आरोप.

दोनों पर ये थे आरोप

1- प्रमुख सेवादार शिवा उर्फ सेवाराम

क्‍या था आरोप: छात्रा को शाहजहांपुरा से दिल्ली और दिल्ली से जोधपुर बुलाया. जोधपुर के मणाई आश्रम में आसाराम से मिलाने की व्यवस्था की थी.

2- रसोइया प्रकाश द्विवेदी

क्‍या था आरोप: शरद, शिल्पी, शिवा और आसाराम के बीच मध्यस्थ बना. छात्रा के परिजनों को जाने का कहकर छात्रा के अकेली रहने की स्थिति पैदा की थी.

इलाज के लिए आश्रम आई थी पीड़िता

 बता दें, आसाराम पर इलाज के लिए आश्रम आई एक 16 साल की नाबालिग लड़की से बलात्कार का आरोप था, जिसमें अब वो दोषी ठहराए गए हैं. पीड़ित परिवार के मुताबिक, 5 साल पहले पीड़ित परिवार ने अपने दो बच्चों को आसाराम के छिंदवाडा के गुरुकुल में पढ़ने के लिए भेजा था. 7 अगस्त 2013 को पीड़िता के पिता को छिंदवाडा गुरुकुल से बेटी के बीमार होने की खबर मिली.

कुटिया में बुलाकर रेप का आरोप

अगले दिन जब पीड़िता के माता पिता छिंदवाडा गुरुकुल पहुंचे. उन्हें बताया गया कि उनकी बेटी पर भूत-प्रेत का साया है. इसे आसाराम ही ठीक कर सकते हैं. 14 अगस्त को पीड़िता का परिवार आसाराम से मिलने उनके जोधपुर आश्रम पहुंचा. 15 अगस्त की शाम को पीड़िता को ठीक करने के बहाने से आसाराम ने उसे अपनी कुटिया में बुलाकर रेप किया.

दिल्ली में दर्ज कराया था केस

इसके बाद पूरा परिवार घर वापस लौटा, तो 17 अगस्त को लड़की ने अपने घरवालों को सारी बात बताई. इसी बीच उन्हें पता चला कि आसाराम 18 से 20 अगस्त तक दिल्ली के रामलीला मैदान में शिविर कर रहे हैं. लिहाजा पूरा परिवार दिल्ली पहुंच गया और उन्होंने रामलीला मैदान के पास कमला मार्केट थाने में केस दर्ज करा दी.

इंदौर आश्रम से हुई थी गिरफ्तारी

यहां जीरो एफआईआर दर्ज कराई गई. इसके बाद इस केस को जोधपुर ट्रांसफर कर दिया गया. लेकिन जोधपुर पुलिस आसाराम पर हाथ डालने से डरती रही. पीड़ित परिवार ने हार नहीं मानी. मीडिया में खबर आने के बाद सरकार और पुलिस पर दबाव बढ़ा. इस तरह 16 दिन बाद आसाराम को इंदौर आश्रम से गिरफ्तार कर लिया गया.