इंदिरा कुमारी – जवान/फौजी/सैनिक – साप्ताहिक प्रतियोगिता

विखर गया केश टूटा कंगन
श्रृंगार सहम यूं रह गया
द्रवित हो अब नयन काजल
अश्रुधार संग बह गया।

यह धर्मपत्नी है कर्मपत्नी
है अत्यंत दुखद उसका समय
गर्भ में छिपी स्मृति पति की
ढाढ़स न बांधता हृदय।

था स्वामी उसका सबल सैनिक
कृतज्ञ राष्ट्र प्रति देशभक्त
दे शहादत शहीद हुआ
पहुंचा शिखर ,कर मार्ग प्रशस्त।

आज सूनी हुई गोद माता की
मचा उर में हाहाकार
हुए विचलित व्याकुल पिता
चला गया उनका आधार।

टूटी आस आज बहन की
छूटा भाई बहन का प्यार
टूट गया बंधन रक्षा का
अभिशाप हुआ त्योहार।

था शहीद सपूत वो भारत मां का
चुका दिया वो अपना ऋण
शव गिरा जिस धरती पर उसका
धन्य हुआ वहां का तृण।

अब चल कलम अश्रुपूर्ण नयन संग
श्रद्धा सुमन करें अर्पित
है शहीद यह कर्मवीर
किया जीवन अपना समर्पित।
जय हिन्द