इंदिरा कुमारी  – देश,नागरिक – साप्ताहिक प्रतियोगिता

गाॅव-गाॅव मिल शहर बना
शहर-शहर मिल राज्य
राज्य-राज्य मिल देश बना
भारत एक गणराज्य।

देश व्यवस्थित तब होता
व्यवस्थित होता संविधान
हो अधिकार संग जन जन में
कर्तव्य मूल का ज्ञान।

व्यापक नियम अधिकार कर्तव्य का
बनाता हमें सामाजिक
राजनीतिक नेतृत्व हमें
सभ्य भारतीय नागरिक।

जन्म कर्म समाज सेवा
है मूल कर्तव्य मौलिकता
नागरिक हैं वो भारत के
है मताधिकार नागरिकता।

ले शपथ हम भारतीय
बचाऐं साख संवैधानिक
सुनिश्चित कर कर्तव्य पथ
बनें धर्म निरपेक्ष सामाजिक।

स्वास्थ्य शिक्षा स्वच्छता
है जीवन सहारा
मिले सबको समान रुप से
हो उद्येश्य हमारा।

अकेले चना भाड़ न फोड़ता
कहावत यह पौराणिक
साथ -साथ मिल एक होकर
सख्त बनें हम नागरिक।

कर ख्याल देश भेष का
सुरक्षित चले सियासत
बहे न धारा लोभ मोह की
कि प्रवाहित हो विरासत।

अब छोड़ धर्म भ्रम संचालित हो
स्वस्थ सोच सुविचारिक
कर्तव्यनिष्ठ बन विकास मार्ग पर
चलें भारतीय नागरिक।
जय हिन्द

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