डॉ बी निर्मला – मकरसंक्रांति – साप्ताहिक प्रतियोगिता

छोड़ो भ्रांति,ले आओ मुख पर कांति,ज्योतिष,पौराणिक,धार्मिक और वैज्ञानक आधार के संग आया,नव वर्ष का पहला पावन पर्व मकर संक्रांति।

सूर्य के राशि परिवर्तन को कहते संक्रांति,सूर्य के धनु से,मकर राशि में प्रवेश कहलाए,मकर संक्रांति। इस दिन सूर्य बदले,अपनी चाल दक्षिण से उत्तर की ओर,नाराज़ पिता सूर्य,चले खुशी खुशी अपने पुत्र,शनि के घर की ओर।

इस शुभ दिन का किया चयन भीष्म पितामह ने,अपना देह त्यागने के लिए,इसी दिन गंगाजी पीछे पीछे चली भगीरथ के,कपिल मुनिआश्रम होकर सागर के लिए।
किया भगीरथ ने पूर्वजों का तर्पण,तर्पण स्वीकार गंगा चली समुद्र,को अपना अर्पण।

विष्णु ने असुरों का अंत किया इस दिन, बुराई व नकारात्मकता का अंत इसीसे माना जाता,मकर संक्रान्ति के पावन पर्व से सभी कार्यों का शुभारंभ है किया जाता।

शरद ऋतु होती क्षीण,आगमन होता बसंत का,रातें छोटी होती जाती,दिन है बढ़ता जाता।
तिल के लड्डू,और खिचड़ी इस दिन घर घर जरूर है बनती,
रंग बिरंगे पतंगों से सजता अंबर और रंगोली से पावन धरती।

जप तप,ध्यान,स्नान,दान पुण्य का काम किया जाता,माघी,बिहू , लोहड़ी,पोंगल आदि नाम से,मकर संक्रांति पर्व है मनाया जाता।