उसकी नज़र

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मर्ज़-ए-इश्क-ए यार  खुद में पाले हुए हैं

उसके दीदार से नजरों में उजाले हुए हैं !

       जब-जब तन्हाई के सहराओं में वो भटका
    
       तब-तब मेरी मुहब्बत के उसे प्याले हुए हैं !

 है नूर उसका ऐसा भुलाया जो न जाता

उसीके चराग़ों से उजाले हुए हैं !

         है  रंज-ओ-ग़म अज़ीज़ इस कदर मुझे उसका        

      कि जश्न तमाम सोगों के साये हुए हैं !


इल्म-ए-जनाज़ा-ए मुहब्बत तो था मुझे


पर मौत के अंदाज़ निराले हुए हैं !


        छुआ जहाँ-जहाँ था उसकी नज़रों ने दिल को

        नासूर बनके आज वहीं छाले हुए हैं !

उसी नजर से देखले मुझे मौत से पहले

बस इतनी सी हसरत कहीं पाले हुए हैं ………….

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  • Pankhuri Sinha

    bahut koobsoorat nazm, khoobsoorat urdu