ए फ़रवरी कैसे तुम्हें भुला दूँ-दीपक अनंत राव “अंशुमान”

ए फ़रवरी कैसे तुम्हें भुला दूँ

फ़ेब्रुम से बना हुआ मधुर शब्द,
शुद्धता को लाने वाला शब्द,
आ गया है वह फ़रवरी दिल बहलाने,
मन बहलाने और गहराइयों पर छा जाने,
वो आ गया फ़रवरी अपनी पहचान को लेकर၊
मौसम अब ढंड नहीं ज्यादा गरमी नहीं,
जहाँ जहाँ देखो असीम सुन्दरता दीखती,
दोनों हाथों से जमाने को गले लगाती फरवरी,
में अब एक शायर चन्द गज़ल सुनाती၊
बगल मेरी महबूबा चुपके,
चमकीली आँखों से मुझे जगाती,
कभी कभी आखों आखों इशारे हो रही,
हँसते हुए दिल के नीड में बसती၊၊
आहिस्ता गले लगाता हूँ मैं,
शरमीली आखें मेरी बाहों में भी,
दोनों हाथों से अब उसे श्रृंगार करता हूँ मैं,
प्यार से कपोलों की लालिमा चुराता हूँ၊၊
मदिरा झलकती होठों से,
पीकर दो बूँद में बह रहा हूँ,
आज चौदह जनवरी
मोहबत का महीना,
आज वालण्टेन्स डे,सिर्फ प्यार करने वालों का नाम ॥

© दीपक अनंत राव “अंशुमान”
कवि एवं अध्यापक
केरला