ऐसे कैसे बचेंगी बेटियां? अपराध के आंकड़े रोंगटे खड़े कर देने वाले

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उन्नाव और कठुआ रेप केस ने फिर से पूरे देश को हिलाकर रख दिया है. पांच साल पहले पूरे देश को हिलाकर रख देने वाले निर्भया गैंगरेप केस के बाद राजधानी दिल्ली में इंडिया गेट पर फिर से हजारों लोगों ने कैंडल मार्च निकाला. निर्भया कांड के बाद इन पांच वर्षों के दौरान रेप से जुड़े कई कानूनों को सख्त किया गया, इसके बावजूद देशभर में रेप के मामले कम होने का नाम नहीं ले रहे. कई राज्यों ने तो रेप के दोषियों के लिए सजा-ए-मौत का प्रावधान तक कर दिया है. लेकिन हम देख रहे हैं कि कानून के सख्त करने के बावजूद रेप के मामलों में कोई कमी नहीं आ रही. निर्भया कांड के बाद हुए ये कानूनी बदलाव

कानून हुआ सख्त

निर्भया कांड के बाद पूरे देश में बलात्कारियों के खिलाफ कानून को सख्त बनाने की मांग ने जोर पकड़ा था. इस जघन्य कांड के तीन माह के भीतर बलात्कार और महिलाओं के यौन उत्पीड़न से जुड़े कानूनों की समीक्षा की गई. और उनमें फेरबदल कर उन्हें सख्त बनाया गया.

शातिर नाबालिगों पर शिकंजा

निर्भया कांड के बाद विशेष मामलों में 16 से 18 साल की उम्र वाले अपराधियों के खिलाफ वयस्क अपराधियों की तरह केस चलाने का फैसला लिया गया. निर्भया कांड से पहले तक जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के तहत रेप का दोषी पाए जाने पर नाबालिग को अधिकतम 3 साल की सजा हो सकती थी. लेकिन अब इस कानून में बदलाव कर विशेष मामलों में किसी नाबालिग को वयस्क की तरह सजा सुनाई जा सकती है.

निर्भया फंड की स्थापना

निर्भया कांड के बाद केंद्र सरकार ने निर्भया फंड की स्थापना की थी. निर्भया निधि में सरकार ने 1000.00 करोड़ रूपये की राशि का प्रावधान किया. यह फंड दुष्कर्म की पीड़ितों और उत्तरजीवियों के राहत और पुनर्वास की योजना के लिए बनाया गया था. इसमें प्रावधान है कि प्रत्येक राज्य सरकार, केन्द्र सरकार के समन्वय से दुष्कर्म सहित अपराध की पीड़िताओं को मुआवजे के उद्देश्य से फंड उपलब्ध कराएगा. अब तक 20 राज्यों और सात संघ शासित प्रदेशों ने पीड़ित मुआवजा योजना लागू कर दी है.

निर्भया कांड के बाद कानून में हुए इन बदलावों के बावजूद आंकड़े बताते हैं कि रेप के मामलों में कोई कमी नहीं आई है. यहां तक कि पुलिस के रवैये में भी कोई बदलाव देखने को नहीं मिला है. नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़े बताते हैं कि देशभर में रेप के मामलों में बढ़ोत्तरी ही हुई है. सबसे हैरानी वाली बात तो यह है कि नाबालिगों के खिलाफ रेप के मामलों में वृद्धि हुई है.

रोज 100 से अधिक महिलाओं से होता है रेप

नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों के मुताबिक, 2016 में देशभर में महिलाओं के साथ रेप के कुल 38947 मामले सामने आए, मतलब हर रोज औसतन 107 महिलाएं रेप का शिकार हुईं. जबकि 2014 में यह औसत 90 के करीब था. राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार 2013 में भारत में बलात्कार की घटनाओं की संख्या बढ़कर 33,707 हो गयी जो 2012 में 24,923 थी। वर्ष 2013 में 15,556 मामलों में दुष्कर्म पीड़ितों की उम्र 18 से 30 साल के बीच थी.

NCRB के आंकड़ों के मुताबिक, 2016 में महिलाओं के खिलाफ अपराध के कुल 338954 मामले सामने आए. मतलब देशभर में रोज औसतन 928 महिलाएं किसी न किसी अपराध का शिकार हुईं. इन आंकड़ों की सबसे डरावनी तस्वीर यह है कि यौन शोषण का शिकार होने वालों में बच्चों का प्रतिशत काफी तेजी से बढ़ा है.

रोज यौन शोषण-किडनैपिंग का शिकार होते हैं 290 बच्चे

नेशनल क्राइम ब्यूरो रिकॉर्ड के मुताबिक, देश में हर रोज 290 बच्चे ट्रैफिकिंग, जबरन मजदूरी, बाल विवाह, यौन शोषण जैसे अपराधों के शिकार होते हैं. देश में 12 साल की उम्र से कम वाले बच्चों के साथ मर्डर, किडनैपिंग जैसी घटनाएं काफी अधिक मात्रा में होती हैं.

2014 में बच्चों के साथ हुए अपराध के कुल 89,423 मामले दर्ज हुए थे, 2015 में ये नबंर 94,172 तक पहुंच गया. और 2016 में इस आंकड़े ने 1 लाख का नंबर भी पार कर लिया. इनमें भी POCSO कानून के तहत दर्ज होने वाले मामलों की संख्या 8904 से बढ़कर 35980 तक पहुंची है.


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