औरंगाबाद हिंसा: सिर्फ पानी नहीं है दो समुदायों के बीच मनमुटाव की वजह

महाराष्ट्र के औरंगाबाद में बीती रात दो समुदायों के बीच हिंसा में जमकर उपद्रव मचा. रात भर लोग या तो डरे सहमे भागते रहे या उपद्रव मचाने वाले हिंसा फैलाते रहे. पथराव हुआ, दुकानें जला दी गईं, गाड़ियां फूंक दी गईं. और इस दौरान कहीं पुलिस का कोई नामो निशान नहीं. औरंगाबाद हिंसा को लेकर अब कई तरह की बातें सामने आ रही हैं और दोनों समुदायों के बीच मनमुटाव और हिंसा भड़कने की कई वजहें बताई जा रही हैं.

यहां तक कि हिंसक भीड़ को काबू करने के लिए पुलिस को गोलियां चलानी पड़ी, जिससे दो व्यक्तियों की मौत हो गई. पुलिस की गोली से एक बच्चा भी गंभीर रूप से घायल हुआ है. हिंसक झड़प में अब तक 16 पुलिसकर्मियों सहित 41 लोगों के घायल होने की खबर है.

फिलहाल औरंगाबाद के पुराने हिस्से सहित कई इलाकों में धारा 144 लगा दी गई है और बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है. शनिवार की सुबह से स्थिति काबू में है, शांति स्थापित होने लगी है, लेकिन माहौल अभी भी तनावपूर्ण बना हुआ है.

इस तरह भड़की हिंसा

दरअसल औरंगाबाद में दोनों समुदायों के बीच तनाव का माहौल गुरुवार से ही बनने लगा था. औरंगाबाद महानगर पालिका ने गुरुवार से पानी के अवैध कनेक्शन काटने का अभियान शुरू किया था. गुरुवार को औरंगाबाद के मोती कारंजा इलाके में नगर निगम ने अवैध पानी के कनेक्शन काटे.

लेकिन नगर निगम द्वारा पानी का कनेक्शन काटे जाने को लेकर एक समुदाय भड़क उठा और नगर निगम पर आरोप लगाए कि उसने उसी समुदाय विशेष के लोगों के पानी कनेक्शन काटे हैं, जबकि दूसरे समुदाय के अवैध पानी के कनेक्शन नहीं काटे गए. इसी बात को लेकर दोनों समुदायों के बीच तनाव की स्थिति पनपी. शुक्रवार की दोपहर से ही तनाव का माहौल बनने लगा था, जो रात होते-होते हिंसा में बदल गई.

विधानसभा में उठ चुका है पाइप लाइन प्रोजेक्ट का मुद्दा

बताते चलें कि औरंगाबाद में एक एनक्लोज्ड पाइप लाइन का बड़ा प्रोजेक्ट शुरू होने वाला था, लेकिन निजीकरण को लेकर इसका काफी विरोध हुआ था. इस प्रोजेक्ट की लागत 350 करोड़ से अचानक 1200 करोड़ रुपये किए जाने को लेकर महाराष्ट्र विधानसभा में भी यह मुद्दा उठा.

व्यावसायिक वर्चस्व की थ्योरी

इसके अलावा दोनों समुदायों के बीच तनाव के पीछे शहर में व्यावसायिक वर्चस्व को भी कारण बताया जा रहा है. साथ ही यह भी कहा जा रहा है कि औरंगाबाद में एक खास राजनीतिक दल के सर्वाधिक पार्षद चुने गए, जिसे लेकर भी मनमुटाव की अफवाहें गर्म हैं.

दो महीने से रिक्त है कमिश्नर का पद

गौरतलब है कि औरंगाबाद में इस समय कमिश्नर का पद रिक्त है. जानकारी के मुताबिक, औरंगाबाद में कचरे के निपटान को लेकर कई महीने से तनाव की स्थिति बनी हुई थी. कचरे के निपटान के मुद्दे पर लोगों की नाराजगी संभालने में नाकाम रहने के बाद औरंगाबाद के कमिश्नर अमितेष कुमार को छुट्टी पर भेज दिया गया और बाद में उनका तबादला कर दिया गया. उसके बाद से बीते दो महीने से स्पेशल IG मिलिंद भरांबे ने ही औरंगाबाद के कमिश्नर का अतिरिक्त प्रभार संभाल रखा है.

मिलिंद भरांबे ने बताई ये वजह

औरंगाबाद कमिश्नर का प्रभार संभाल रहे स्पेशल IG मिलिंद भरांबे ने ‘आजतक’ को बताया कि दो समुदायों के बीच छोटे सी बात को लेकर झड़प शुरू हुआ. दोनों समुदायों के बीच पथराव हुआ, जिसके बाद यह हिंसा आस-पास के इलाकों में भी फैल गई. अफवाह भड़काने के चलते यह हिंसा और भड़की. लेकिन अब हालात पर काबू पा लिया गया है.

हिंसक भीड़ को काबू में करने के लिए पुलिस ने रबर बुलेट चलाए, जो एक व्यक्ति को संवेदनशील जगह जा लगी, जिससे उसकी मौत हो गई. यह दुर्भाग्यपूर्ण है. शांति बहाली के लिए दोनों समुदायों के नेताओं से बातचीत चल रही है. दोनों समुदायों के बीच कुछ चीजों को लेकर मनमुटाव की स्थिति है, जिसकी जांच की जा रही है.

हर साल पानी की किल्लत से जूझता है औरंगाबाद

गौरतलब है कि औरंगाबाद महाराष्ट्र के मराठवाड़ा इलाके में आता है और हर साल गर्मियों में मराठवाड़ा इलाके में पानी की किल्लत हो जाती है. मराठवाड़ा में पानी की इस किल्लत का सर्वाधिक खामियाजा औरंगाबाद को भुगतना पड़ता है.

दो महीने पहले भी रामनवमी पर भड़की थी हिंसा

औरंगाबाद में इसी साल 27 मार्च को रामनवमी वाले दिन भी हिंसा भड़क उठी और स्थिति पर नियंत्रण पाने के लिए प्रशासन को कर्फ्यू लगाना पड़ा था. इसके बावजूद औरंगाबाद में बीते दो महीने से कमिश्नर की नियुक्ति नहीं की गई थी, जिसे राज्य सरकार की बड़ी लापरवाही के तौर पर देखा जा रहा है.