कर्नाटक चुनाव: जानिए उस मठ की ताकत, जो राष्ट्रभक्त-गौ प्रेमियों को वोट देने की कर रहा है अपील

कर्नाटक की सियासत में हमेशा से ही धार्मिक मठों का अपना खासा प्रभाव रहा है. राज्य के 30 जिलों में करीब 600 मठ हैं. कर्नाटक में मंदिरों के शहर उडुपी में श्रीकृष्ण मठ है. ये दक्षिण भारत में हिंदू ब्राह्मणों का सबसे प्रमुख मठ कहा जाता है. कर्नाटक में जारी चुनाव प्रचार के बीच श्रीकृष्ण मठ के प्रमुख विद्याधीष तीर्थ स्वामी ने कहा है कि मठ का आशीर्वाद उसी को मिलेगा जो राष्ट्रभक्त है, जो गौ प्रेमी है और जो धर्म में विश्वास करता है.

मोदी के दौरे से पहले बड़ा बयान

पीएम नरेंद्र मोदी आज से कर्नाटक के सियासी समर में उतर रहे हैं. वे श्रीकृष्ण मठ जाकर माथा टेकेंगे. माना जा रहा है कि मोदी श्रीकृष्ण मठ के जरिए कर्नाटक के हिंदू वोट को साधने की कोशिश करेंगे. बीजेपी शुरू से कर्नाटक चुनाव में हिंदुत्व के इर्द-गिर्द सियासी बिसात बिछाने की कोशिश में लगी है. ऐसे में श्रीकृष्ण मठ के बयान ने बीजेपी की मुंहमांगी मुराद पूरी कर दी है. प्रधानमंत्री मोदी बतौर गुजरात के मुख्यमंत्री भी श्रीकृष्ण मठ में माथा टेक चुके हैं.

बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने फरवरी में श्रीकृष्ण मठ में आकर माथा टेका था. शाह के साथ बीएस येदियुरप्पा साथ में थे. ये मठ बीजेपी के मजबूत दुर्ग उत्तर कर्नाटक में स्थित है. इस मठ का सहयोग पहले भी बीजेपी को मिलता रहा है. बीजेपी ने 1985 में पहले चुनाव में 18 सीटें जीती जिनमें से 11 इसी क्षेत्र से थीं.

कर्नाटक में उडुपी हिंदुत्व का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है. संघ से लेकर विश्व हिंदू परिषद तक की जड़ें यहां मजबूत हैं. पिछले साल नवंबर में उडुपी में धर्मसंसद का आयोजन हुआ था. इस धर्मसंसद में राम मंदिर निर्माण, गौ रक्षा और हिंदू धर्म की रक्षा के प्रस्ताव पास किए गए थे. बता दें कि ऐसी ही धर्मसंसद 1969 में उडुपी में पहले भी हो चुकी है.

13वीं सदी में स्थापित मठ

श्रीकृष्ण मठ को 13वीं सदी में वैष्णव संत माधवाचार्य द्वारा स्थापित किया गया. वे द्वैतवेदांत सम्प्रदाय के संस्थापक थे. माधवाचार्य समर्थक वैष्णव ब्राह्मणों के लिए श्रीकृष्ण मठ की मान्यता सबसे ज्यादा अहम है. उडुपी में कुल 8 मठ हैं जिसमें श्रीकृष्ण मठ सबसे प्रमुख है और जिसकी मान्यता भी सबसे ज्यादा है.

श्रीकृष्ण मठ का इतिहास और मान्यता

मान्यता है कि एक बार अत्यंत धर्मनिष्ठ एवं भगवान कृष्ण के प्रति समर्पित भक्त कनकदास को मंदिर में प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई थी. इस बात ने उन्हें परेशान नहीं किया, बल्कि उन्होंने और अधिक सिद्दत और निष्ठा के साथ प्रार्थना की.

भगवान कृष्ण उनसे इतने प्रसन्न हुए कि अपने भक्त को अपना स्वर्गीय रूप दिखाने के लिए मठ (मंदिर) के पीछे एक छोटी सी खिड़की बना दी. आज तक, भक्त उसी खिड़की के माध्यम से भगवान कृष्ण की अर्चना करते हैं, जिसके द्वारा कनकदास को एक छवि देखने का वरदान मिला था.

श्रीकृष्ण मठ की सियासी ताकत

मठ से जुड़े लोगों का दावा है कि पिछले 800 सालों से माधवाचार्य समर्थक अपनी परंपरा के तहत इस मठ में भगवान कृष्ण की सेवा करते आ रहे हैं. ऐसे में उत्तर कर्नाटक में इस मठ का काफी प्रभाव है. इस मठ के जरिए उत्तर कर्नाटक की राजनीति चलती है.

उत्तर कर्नाटक की 12 जिलों में 80 विधानसभा सीटें आती है. बीजेपी 2008 में कर्नाटक की सत्ता में कमल खिलाया था तो उसमें इस क्षेत्र का काफी महत्वपूर्ण योगदान था. बीजेपी ने 80 में से 56 सीटों पर जीत दर्ज की थी.

कर्नाटक में चुनाव के मद्देनजर हर पार्टियों के बड़े नेता अलग-अलग मंदिरों में माथा टेककर ना सिर्फ भगवान का आशीर्वाद लेने की कोशिश कर रहे हैं बल्कि सभी राजनीतिक दलों में खुद को एक दूसरे से बड़ा हिंदू दिखाने की होड़ सी मची हुई है. ऐसे में श्रीकृष्ण मठ का बयान आना और पीएम मोदी का आज वहां जाकर माथा टेकना राज्य की सियासत को बड़ा संदेश दे रहा है.