कार्रवाई: जानबूझकर बैंक का कर्ज नहीं चुकाने वालों पर CBI का शिकंजा

पंजाब नेशनल बैंक के हजारों करोड़ के घोटाले के बाद सरकार बैंकों के बड़े बकायेदारों पर शिकंजा कसने जा रही है। 50 करोड़ रुपये से ज्यादा का कर्ज लेकर इसे जानबूझकर नहीं चुकाने वालों की फेरहिस्त में एक हजार से भी ज्यादा बकायेदार हैं। सार्वजनिक बैंक इनकी सूची सीबीआई को सौंपने की तैयारी कर रहे हैं। फिर विदेश जाने पर पाबंदी से लेकर संपत्ति जब्त करने समेत अन्य कार्रवाई का सिलसिला शुरू होगा।

फेहरिस्त और हो सकती है लंबी 
देशभर में सरकारी बैंकों का कर्ज नहीं चुका पा रहे बकायेदारों की संख्या सात हजार से भी ज्यादा है। लेकिन इनमें जानबूझकर कर्ज नहीं चुकाने वाले एक हजार से ज्यादा हैं। बैंकिंग सूत्रों की माने तो सार्वजनिक बैंकों की ओर से इस सप्ताह के अंत तक पहली सूची सीबीआई को सौंप दी जाएगी। इस सूची में 1072 बकायेदारों के नाम हैं। कुछ छोटे बैंकों ने अभी इस सूची में अपने बकायेदारों के नाम शामिल नहीं किए हैं। ऐसे में यह संख्या और बढ़ सकती है।

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वित्त मंत्रलय ने दिए थे निर्देश
बैंक इन बकायेदारों के पास फंसी कर्ज की रकम लौटाने की तमाम कोशिश कर थक चुके हैं। वित्त मंत्रलय ने हाल ही में सरकारी बैंकों निर्देश दिया था कि 50 करोड़ रुपये से ज्यादा के फंसे हुए कर्ज (NPA) की छानबीन कर 15 दिन में उसका ब्योरा सीबीआई को सौंप दें।

संपत्ति जब्त होगी
वित्त मंत्रलय के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक रिजर्व बैंक और मंत्रलय एनपीए की वसूली के मामले में हर संभव कदम उठा रहे हैं। सीबीआई अभियोग चलाने, संपत्ति जब्त करने जैसे कई कदम उठा सकती है। भगोड़ा आर्थिक अपराध विधेयक-2018 संसद में पारित होने के बाद एजेंसियों को कड़े कदम उठाने की और क्षमता मिल जाएगी।

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बैंक बना रहे हैं ब्लूप्रिंट
सरकार ने कर्ज के फंसने के बढ़ते जोखिमों से निपटने के लिए बैंकों के कार्यकारी निदेशकों और चीफ टेक्नोलॉजी अफसर से ब्लूप्रिंट बनाने को भी कहा है। उन्हें इसमें सभी खामियों की पहचान के भी निर्देश दिए। आपको बता दें कि साल 2017 के सितंबर तक सार्वजनिक बैंकों के पास 7.5 लाख करोड़ रुपये का एनपीए जमा है। इसके साथ ही पीएनबू घोटाला सामने आने के बाद शेयर बाजार में आ रही लगातार गिरावट के चलते निवेशकों के 56 करोड़ रुपये डूब चुके हैं।