किरण बाला  – गणतंत्र दिवस, संविधान– साप्ताहिक प्रतियोगिता

आज इस गणतन्त्र दिवस पर 

आओ मिलकर प्रण करें !

 भ्रष्टाचार और आतंकवाद को

 दूर करने का यत्न करें |

 न बिलखेगा बेहाल मानव भूख से अब

 करेंगे कर्म निष्कपट, निश्चय दृढ़ कर 

  न कोई जुल्म न कोई सितम होगा

 न जलाई जाएंगी बेबस अबला अब |

आज इस गणतन्त्र दिवस पर 

आओ मिलकर प्रण करें 

अराजकता और अत्याचार को

दूर करने का यत्न करें |

न शोषित शोषण से होगा मानव अब

 करें जो एकता से प्रयत्न परस्पर सब

न बुझने देंगे किसी का दीपक हम 

न छीना जाएगा किसी का आश्रय अब |

आज इस गणतन्त्र दिवस पर 

आओ मिलकर प्रण करें 

अशान्ति और अनीति को

दूर करने का यत्न करें |

न मरेगा कोई भी देश के गद्दारों से अब

करेंगे दंडित देश द्रोहियों को हम 

न होगा चीरहरण किसी द्रौपदी का अब

करेंगे तबाह इस दु:शासन राज को हम |

आज इस गणतन्त्र दिवस पर 

आओ मिलकर प्रण करें 

अपनी दुर्बलताओं और विकारों को

दूर करने का यत्न करें |