किसके कहने पर BJP में शामिल हुए थे वरुण गांधी, कहां पर हुई चूक?

उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर से बीजेपी सांसद वरुण गांधी ने कहा है कि राजनीति में वंशवाद बढ़ गया है, इसके कारण ही आम लोग राजनीति में नहीं आ पा रहे हैं. वरुण का ये बयान चर्चा का विषय बन गया है. वरुण खुद कांग्रेस के बड़े नेता संजय गांधी के बेटे हैं. गांधी परिवार का हिस्सा होने के बावजूद वह भारतीय जनता पार्टी का हिस्सा हैं, लेकिन जिस उम्मीद के साथ वह बीजेपी में आए शायद वो पूरी नहीं हो पाई.

वरिष्ठ पत्रकार और लेखक विजय त्रिवेदी बताते हैं कि वरुण गांधी की बीजेपी में एंट्री प्रमोद महाजन के कारण हुई थी. प्रमोद महाजन ने ही अटल बिहारी वाजपेयी और लाल कृष्ण आडवाणी को इस बात के लिए राजी किया कि अगर हम गांधी परिवार के किसी सदस्य को अपने साथ लाएंगे तो हमें आसानी होगी.

The Lallantop को दिए गए इंटरव्यू में विजय त्रिवेदी ने बताया कि महाजन ने ही वाजपेयी को सलाह दी कि अगर गांधी परिवार का एक व्यक्ति हमारे यहां आए तो हम राहुल गांधी को टक्कर दे पाएंगे.

इसके लिए प्रमोद महाजन ने वरुण गांधी को भी समझाया. जो कि एक मुश्किल काम था. उनके अनुसार, तब प्रमोद महाजन ने समझाया कि जब भी कांग्रेस में कोई आगे बढ़ेगा तो राहुल गांधी ही बढ़ेंगे तुम नहीं लेकिन बीजेपी में नंबर 1 हो सकते हो. अगर राहुल के खिलाफ खड़े होगे तो वैसे ही बड़े होगे.

विजय त्रिवेदी ने बताया कि जब प्रमोद महाजन का निधन हो गया तो उसके बाद उनकी मुलाकात वरुण गांधी से हुई थी. तब वरुण ने उन्हें बताया था कि मुझे वाजपेयी, आडवाणी ने कहा था कि हम सब ठीक कर देंगे लेकिन नहीं किया गया. तब विजय त्रिवेदी बोले कि आप पहले नेता हो जिसने उनके लिए ऐसी भाषा का इस्तेमाल किया है.

यहां देखें पूरा इंटरव्यू –

उन्होंने बताया कि 2013 में मोदी के पीएम पद का उम्मीदवार घोषित होने से पहले आडवाणी की एक रैली हुई जिसके आयोजक वरुण गांधी थे. यहां वरुण गांधी से गलती हुई. तब ऐलान के बाद मोदी चार-पांच दिन दिल्ली में थे, लेकिन वो कभी वरुण गांधी से नहीं मिले थे. अब सांसद होने के बाद भी मोदी-वरुण की सिर्फ चार-पांच फॉर्मल मुलाकात हुईं.

उनके मुताबिक, वरुण गांधी से दूसरी गलती उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव से पहले हुई. जब उन्होंने इलाहाबाद बैठक के लिए पूरे शहर में पोस्टर लगवाई. जिसमें पोस्टरों में मांग थी कि वरुण की ओर से उन्हें सीएम बनाने की मांग थी.

आपको बता दें कि वरुण गांधी पिछले कुछ दिनों से शांत चल रहे हैं. बीते दिनों में रोहिंग्या मुस्लिमों के मुद्दे के दौरान वरुण गांधी ने पार्टी और सरकार से अलग लाइन पकड़ी थी. 2017 में हुए उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान कई बार वरुण गांधी को यूपी सीएम बनाने की मांग भी उठी थी.

इससे पहले भी कई बार वरुण गांधी इस प्रकार का भाषण दे चुके हैं. बीते साल भी वरुण ने कहा था कि प्रभावशाली पिता या गॉडफादर के बिना राजनीति में जगह बनाना मुश्किल है. उन्होंने कहा, मैं आपके पास आया हूं और आप हमें सुन रहे हैं. लेकिन तथ्य यह है कि मेरे नाम में अगर गांधी नहीं होता तो मैं दो बार सांसद नहीं बनता और आप मुझे सुनने के लिए यहां नहीं आते.