कोरोना – प्रिया रॉय


चारों और काला साया है
मानव के अंत करण में छाया है
नहीं कोई उच्च ना कोई नीच
आज बैठे हैं सब भय के बीच
हमारी आज की शिक्षा
आज मांग रही है भिक्षा

यह कैसी आज फैली बीमारी है
जहां धन दौलत भी ना पड़े भारी है
कहां हमारी शक्ति है आज कहां हमारी भक्ति है
चारों और घनघोर छाया करुणा ने हमें डराया

सभी भाइयों और बहनों आओ
सब मिलकर भय को दूर भगाओ
आओ हम सभी भेदभाव भूल जाए
सभी को भले का मार्ग दिखाएं
भूल से भी ना नियम तोड़े
सभी का भला हो यही सोचे

भूल गए हम हमारी सभ्यता
तुच्छ जीव ने याद दिलाई हमारी एकता
कहां गई भारत की गौरव सारी
दुख के पड़े हैं हर एक नर और नारी
कहां गए गोबर की भट्टी
कहां गए आंगन की मिट्टी

राकेट बनाया हिमालय को छोटा दिखाया
हे भगवान मानव ने क्या-क्या कर दिखाया
चारों और आज काली छाया है
हमें बर्बादी की ओर धकेलने वाली माया है
सभी भाइयों और बहनों आओ
सब मिलकर इस को दूर भगाओ
चलो फिर घर-घर शंखनाद बजाएं
अपने भूली सभ्यता को वापस लाएं
आओ सभी प्रण करें एकजुट होकर
पुरानी संस्कारों को वापस लाएंगे मिलकर!!

धन्यवाद

प्रिया रॉय त्रिपुरा