कोर्ट का फैसला सुन पहले जपा राम नाम, फिर हंसने लगा आसाराम

जोधपुर जेल में जज मधुसूदन शर्मा ने जब फैसला सुनाते हुए आसाराम को दोषी करार दिया तो उसका चेहरा उतर गया. कुछ पल शांत रहकर वह राम नाम जपने लगा और फिर अचानक वह नाटकीय अंदाज में हंसने लगा. इसके बाद उसने जज से रहम की गुहार भी लगाई. फिर आसाराम ने वकीलों के कंधे पर हाथ रखकर कहा- कुछ तो बोलो.

5 साल पुराने यौन शोषण के मामले में आसाराम बापू को जोधपुर की अदालत ने दोषी करार दे दिया. सुरक्षा कारणों से जेल में ही कोर्ट लगाई गई. जज मधुसूदन मामले की सुनवाई कर रहे थे. वह सुबह तय वक्त पर अदालत पहुंचे और आरोपियों को तलब किया.

सभी आरोपियों के आ जाने के बाद जज ने आसाराम को बुलाया. वो वहां नहीं था. अदालत की कार्रवाई शुरू हो चुकी थी, लिहाजा जज मधुसूदन शर्मा ने आसाराम को लाने के लिए कहा तो बताया गया कि वह पूजा कर रहा है. फिर वह 15 मिनट बाद जज के सामने पहुंचा.

तभी आसाराम के वकील ने जज से कहा कि वे उनके सामने कुछ कहना चाहते हैं. इस पर जज शर्मा ने वकील को कहा कि अब कुछ नहीं सुनना है. केस की सुनवाई पूरी हो चुकी है. अब निर्णय का समय है. इसके बाद जज शर्मा ने अपने स्टैनो से करीब दो पेज टाइप कराए.

कुछ देर बाद उन्होंने फैसला सुनाते हुए आसाराम को दोषी करार दे दिया. आसाराम के साथ शिल्पी और शरतचंद को भी जज ने दोषी करार दिया. लेकिन शिवा और प्रकाश की कम उम्र का हवाला देते हुए जज ने उन्हें बरी कर दिया.

फैसला सुनते ही आसाराम का चेहरा का उतर गया. वह काफी मायूस दिख रहा था. वह राम नाम का जाप करने लगा. और कुछ देर बाद वह हंसने लगा. इसी दौरान अदालत ने आगे की कार्रवाई शुरू कर दी. सरकारी वकीलों ने आसाराम को कड़ी सजा दिए जाने को लेकर दलीलें देना शुरू किया और सजा पर बहस होने लगी.

इसी बीच फैसला सुनने के बाद आसाराम ने जज से कहा कि वह बूढ़ा हो गया है. उस पर रहम किया जाए. लेकिन जज ने उसकी बातों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी. जोधपुर जेल में बनाई गई विशेष कोर्ट में आसाराम की तरफ से वकीलों की फौज मौजूद थी. उसकी पैरवी करने के लिए कोर्ट में 14 वकील मौजूद थे.