खुद अपने ही देश पर हमला कर रहे हैं सीरियाई राष्ट्रपति असद!

हाकिम और हुकूमतें अवाम को सुनहरे भविष्य का सपना दिखाकर जंग छेड़ती हैं. जंग थमती है तो कोई जीतने की खुशफहमी में डूबा रहता है, तो कोई हारने के ग़म में, जबकि सच्चाई ये है कि जंग में हमेशा ज़िंदगी ही हारती है. पर यहां तो हाकिम भी अपना, मुल्क भी अपना औऱ अवाम भी अपनी. फिर भी अपने ही हाकिम ने अपने ही देश की जनता पर आसमान से ऐसा जहर बरसाया कि पल भर में 70 लोग मौत के मुंह में समा गए. जिनमें ज्यादातर बच्चे थे. जी हां, हम सीरिया में हुए रासायनिक हमले की ही बात कर रहे हैं.

हमले के बाद रुक गई कई सांसें

कहते हैं किलकारियों को मुस्कुराहट देना भी किसी इबादत से कम नहीं है. पर जब सांसें कातिल बन जाए तो किलकारियां गूंजती नहीं बल्कि घुट जाती हैं. और यही हुआ सीरिया के पूर्वी घोउटा में विद्रोहियों के कब्ज़े वाले डोम शहर के साथ. सारा शहर सो कर बस उठा ही था कि शहर के आसामन से नीचे बम गिरा. बम से केमिकल गैस निकली और फिर देखते ही देखते लोगों की सांसों में ऐसी घुली कि 100 से ज्यादा लोगों की सांसें रुक गईं. हज़ारों के दम घुटने लगे.

एअरफोर्स ने किया हमला

सीरिया के द वाइट हेलमेट्स नाम की एक एनजीओ का दावा है कि केमिकल हमला सीरियाई एयरफोर्स ने किया. इसमें 100 से ज़्यादा लोग मारे गए और करीब एक हज़ार लोग जख्मी हो गए. हालांकि एक दूसरी रिपोर्ट में मरने वालों की तादाद 70 के करीब बताई गई है. जिनमें बच्चों की तादाद ज़्यादा है.

रासायनिक बम का खूंखार चेहरा

सीरिया में फिर रासायनिक हमला हुआ. बैरेल बम से छोड़ी गई रासायनिक गैस. और फिर इंसानियत की तारीख ने आसमान से बरसी मौत का ऐसा खौफनाक मंज़र देखा कि बस देखने वालों की रूह कांप उठी. इंसानों के बनाए सबसे खतरनाक और जानलेवा हथियार को इंसानों पर ही आज़माया जा रहा था और आज़माइश ऐसी कि मिनटों में लाशों के ढेर लग गए. आसमान से जो आफत बरसी, वो एक झटके में सत्तर से ज्यादा लोगों को कब निगल गई किसी को पता ही नहीं चला. दुनिया ने रासायनिक बम का खूंखार चेहरा फिर एक बार देखा.

राष्ट्रपति असद ने दिया हमले का हुक्म

द वाइट हेलमेट्स संस्था की मानें तो आसमान से बरसी इस सबसे खौफनाक मौत को बरसाने का हुक्म किसी और ने नहीं बल्कि सीरिया के ही राष्ट्रपति बशर अल असद ने खुद दी थी. इंसानों की बनाई इस दुनिया में इंसानों के ही हाथों बनाए गए इस खौफनाक हथियार यानी रासाय़निक बम को अपने ही लोगों पर गिराने का हुक्म उनका अपना ही नेता दे रहा था.

हमले ने ले ली मासूम बच्चों की जान

इस केमिकल अटैक का सबसे आसान शिकार हुए वो छोटे-छोटे बच्चे, जिन्होंने अभी बड़ों की इस दुनिया में क़दम रखा ही था. बच्चों को सांस लेने में सबसे ज़्यादा दिक्कत होने लगी. जो जहां था वहीं बेहोश होने लगा. पहले दम घुटा और फिर खून की उल्टियां होने लगी और चंद मिनटों के अंदर ही सांसों की डोर टूटने लगे. अस्पताल लाचार और बीमार लोगों से पट गए. बच्चों को डॉक्टरी तौर-तरीक़ों से सांस देने की कोशिश शुरू की गई. लेकिन इस जानलेवा गैस के आगे किसी का ज़ोर नहीं था.

हमले के पीछे सीरियाई राष्ट्रपति

कुछ लोगों ने गैस की तपिश कम करने के लिए ठंडे पानी का सहारा लिया. जिससे फौरी राहत तो मिली, लेकिन ज़िंदगी कम ही को मिली. सीरिया में मानवाधिकारों के लिए काम करने वाले संगठनों के साथ अमेरिका की मानें तो इस हमले के पीछे कोई और नहीं बल्कि खुद सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल असद ही हैं. इस हमले में रूस और ईरान ने उसका साथ दिया. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने दोनों मुल्कों को धमकाते हुए कहा है कि उन्हें इसकी कीमत चुकानी होगी.

चुकानी होगी बशर का साथ देने की कीमत

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा ‘सीरिया में बिना सोचे समझे किए गए केमिकल हमले में कई लोग मारे गए हैं. मरने वालों में औरतें और बच्चे शामिल हैं. वो अराजक क्षेत्र सीरियाई सेना के कब्ज़े में है और वहां बाहरी दुनिया का पहुंचना मुश्किल है. राष्ट्रपति पुतिन, रूस और ईरान जानवर बशर अल-असद को समर्थन देने के लिए जिम्मेदार हैं. उन्हें इसके लिए बड़ी कीमत चुकानी होगी.’

रूस ने आरोपों को खारिज किया

हालांकि खुद सीरियाई फ़ौज के साथ-साथ उनके राष्ट्रपति बशर अल असद के हक में विद्रोहियों पर हमला करने वाले रूस ने इन इल्ज़ामों को सिरे से खारिज कर दिया है. सीरियाई मीडिया के मुताबिक डोम शहर पर इस ज़हरीले हमले के बाद 8 मिसाइलों से भी शहर पर हमला किया गया. स्थानीय मीडिया ने इस मिसाइल हमले का शक अमेरिका पर जताया है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ये हमला सेंट्रल सीरिया के करीब हुआ है. खबर है कि इस हमले में कई लोगों की मौत हुई है. हालांकि पेंटागन ने कहा है कि असद सरकार मुद्दे से भटकाने के लिए इन हमलों में अमेरिका को घसीट रहा है.

सीरिया ने बताया अमेरिका प्रोपेगैंडा

वहीं दूसरी तरफ रासायनिक हमलों की खबर को लेकर सीरियाई सरकार ने साफ किया है कि ये अमेरिका प्रोपेगैंडा और एक झूठ के सिवा कुछ भी नहीं है.. क्योंकि आतंकवादियों के गढ़ में सेना पूरी ताकत से आगे बढ़ रही है और वो इन इलाकों पर जल्द ही कब्ज़ा कर लेगी. ऐसे में उसे किसी रासायनिक हमले की जरूरत नहीं है.

सीरिया का दावा- नहीं था रसायनिक हमला

जबकि रूस ने एक बयान जारी कर ये खुलासा किया कि हमला बेशक सीरियाई फ़ौज ने किया है, लेकिन ये रसायनिक हमला नहीं था. बल्कि फ़ौज की मिसाइल खान शिखाऊन में रसायनिक हथियारों से भरे आतंकवादियों के सबसे बड़े गोदाम पर गिरी जिससे ये हादसा हआ.

सबसे ज्यादा रासायनिक हथियार सीरिया के पास

शक है कि दुनिया में सबसे ज्यादा रासायनिक हथियार इसी सीरिया के पास है। और सीरिया की अवाम फिलहाल अपने ही नेता के खिलाफ सड़कों पर है और उसी सड़क पर अवाम की आवाज कुचलने के लिए उसी अवाम के लीडर आसमान से उन पर ज़हर बरसा रहे हैं.