गीतांजली वार्ष्णेय – जन्म मृत्यु – साप्ताहिक प्रतियोगिता

क्यूँ आती है,कब आती है,एक रहस्य है मृत्यु।प्रकृति का आधार जन्म है,जीवन सत्य है मृत्यु।किसी के लिए अभिशाप,किसी के लिए वरदान है मृत्यु।खुशियाँ का नाम है जीवन,कष्टों का अंत है मृत्यु।अगर न होता डर मृत्यु का,न होती नरक स्वर्ग की चिंता।धर्म अधर्म में भेद न होता,होती बस बल की सत्ता।धर्म का आधार जन्म है,अधर्म का अंत है मृत्यु।न होता भूत, भविष्य,न पुनर्जन्म की कहानी।कर्म का आधार जन्म है,पुनर्जन्म की चिंता है मृत्यु।पृथ्वी का संतुलन,व्रह्म चेतना जन्म,जीवन का अंतिम सत्य है मृत्यु।।