गीतांजली वार्ष्णेय – पति-पत्नी – साप्ताहिक प्रतियोगिता

जीवन नैया का खिवैया पति,पतवार है पत्नी,
गृहस्थी की गाड़ी, जीवन की पटरी का
इंजन गर है पति,तो इंजनका ईंधन है पत्नी।
सृष्टि के संचालन का आधार पति,सृष्टि का विकास है पत्नी।
भूमि की महानता,आकाश की विशालता
धरती का सागर पति,आकाश का पानी है पत्नी।
एक कली खिलकर पौधे का रूप बढ़ाती है,
पत्नी का श्रृंगार पति,जीवन का रूप है पत्नी।
डोरी का पकड़ के दामन, पतंग आसमां छू लेती है,
जीवन की पतंग है पति,तो डोर है पत्नी।
पति पत्नी एक सिक्के के दो पहलू,
एक दूजे के बिन मूल्य नहीं रह जाता है।।
नमक न हो सब्जी में मसाले बे स्वाद हो जाते है ,
जीवन रूपी सब्जी का मसाला है पति,तो नमक है पत्नी।।।