गुरु – इन्दिरा कुमारी

कर गुरु प्रणाम शिक्षक दिवस पर सर हम झुकाऐं
गुरु बड़े गोविन्द से बारंबार दुहराऐं।

श्री राधाकृष्णन जन्मदिवस पर शिक्षक दिवस मनाऐं
पाँच सितम्बर है शुभ अवसर सुन्दर सुयश बनाऐं।

कर्मभूमि पर जीवन है हों कर्म कर हम पेशेवर
मेहनत कर हम पाऐं मूल्य ऐसा ज्ञान हमें दें गुरुवर।

अक्षर अक्षर पढ़ गुरु से साक्षर हम कहलाऐं
विद्या संग विवेक हो गुरु ऐसा गूढ़ सिखाऐं।

प्रेम भाव विवेक संग जो पोथी पढ़ पाए
पांडित्य चमका उनका ही वही पंडित कहलाए।

इस चराचर दुनियां में लोग यहां बहुतेरे
समझें सबको भाव से हो उद्देश्य हमारे।

जीव जन्तु सब अलग अलग गुण अवगुण संसार
गुण पकड़ कलह खत्म करें हो यही सुलह का सार।

व्याकुलता में रोंऐं लेकिन धैर्य संग हो साथ
सबहु नचावत समय गोसाईं समझें रहस्य की बात।

सच्चे मन के लोगों का हम सदैव करें सम्मान
झूठे को भी सच्चाई संग दें प्रेम भाव का ग्यान।

कड़वा वचन बोलने बाला भी अन्दर से मीठा हो सकता
जैसे कड़वा छिलका रखकर फल मधुर रस अन्दर रखता।

बेईमानी भ्रष्टाचारी को खतम करें ईमानदारी से
उद्दंड अपकर्म अत्याचारी को कर सत्कर्म सदाचारी से।

सतर्की वरतें शातिर संग जैसे हम उनसे होशियार
नहीं तो उनका गुलाम होकर सहेंगे उनका अत्याचार।

विश्वास करें हम कुदरत पर जीवन सबका है अनमोल
पंचतत्व से सभी बना है ना हो इसका तोल मोल।

अनुभव ज्ञान का गुरु होता सदैव रखें हम ध्यान
बन अधिकारी दर्प संग करें न अनुभवी का अपमान।

गुरु ऐसा पाठ पढ़ाऐं कि शैतान बने इन्सान
मानवता के इस पाठ से आशीष दें भगवान।

बस है उम्मीद यही गुरु से पर कहाँ गया अस्तित्व
सुख स्वार्थ की चाहतों से घिरा उनका व्यक्तित्व।

गुरु ज्ञानाभाव से हुआ चहुंओर हाहाकार
क्षमा दया तप त्याग अब अर्थहीन लाचार।

गुरु की है गरिमा बहुत गिरे न इनका आचार
बनें गुरु गुरु द्रोण सम लेगा शिष्य अर्जुन अवतार।

क्षमा करें गुरुअब हमें शिष्य हैं हम आज्ञाकारी
ज्योति जगाऐं जीवन में रहेंगे सतत आभारी।