गुरू महिमा – अनन्तराम चौबे अनन्त

गुरू की महिमा
बचपन से देखी है ।
पहली गुरू माँ होती है ।
गुरू का ज्ञान जो देती है ।
 
किताबों में जो नही होता है
गुरू ज्ञान माँ सबको देती है 
जीवन भर इसी ज्ञान से
सबको सही राह मिलती है ।

बातें करना माँ सिखलाती
पापा मम्मी माँ ही सिखाती ।
बच्चा बोलना सीख जाता है
फिर रिश्तों का पाठ पढ़ाती ।

दादा दादी चाचा चाची
घर से रिश्ते शुरू होते है ।
बड़ा भाई बहिन हो घर में
नाना नानी की याद कराती है ।

बुआ मामा भी सगे रिश्ते हैं
उनका भी परिचय देती है ।
ऊंगली पकड़ चलना सिखाती
चलता गिरता उसे उठाती है ।

स्वाथ्य ठीक रहे बच्चे का
उसका पूरा ध्यान भी रखती ।
भूख लगे बच्चे को जब भी
अपने आँचल का दूध पिलाती ।

स्कूल जाओ तब गुरू मिलते है
किताब का लिखा वही पढ़ाते हैं ।
गुरू की महिमा गुरू ही जाने
पहली गुरू बस माँ ही होती है ।

गुरू मां से जो ज्ञान मिलता है
बचपन से सबको मिलता है ।
गुरू मां को नमन वंदन करते हैं
गुरू का ज्ञान जो मां से मिलता है ।