चार साल में वाराणसी के कितने हो पाए PM मोदी, जानिए क्या कहती है काशी

काशी को इतिहास और परंपराओं से भी प्राचीन कहा जाता है. मशहूर लेखक मार्क ट्वेन लिखते हैं, “बनारस इतिहास से भी पुरातन है, परंपराओं से पुराना है, किंवदंतियों (लीजेन्ड्स) से भी प्राचीन है और जब इन सबको एकत्र कर दें, तो उस संग्रह से भी दोगुना प्राचीन है.”

कला, संस्कृति और धर्म के अद्भुत संगम के चलते काशी हजारों साल से देश का सांस्कृतिक और धार्मिक केंद्र रहा है. यही वजह है कि काशी से निकला संदेश पूरे देश और खासकर उत्तर भारत में काफी महत्व रखता है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूं ही नहीं काशी को 2014 में अपने संसदीय क्षेत्र के रूप में चुना, बल्कि वो जानते थे कि यदि काशी सध गया तो सबसे ज्यादा सीटों वाला उत्तर प्रदेश सध जाएगा और यूपी सध गया तो पूरा देश सध जाएगा. 24 अप्रैल 2014 को काशी से पर्चा भरने के बाद नरेंद्र मोदी ने कहा था, “..न मुझे किसी ने भेजा है, न मैं यहां आया हूं, मुझे तो गंगा मां ने बुलाया है.”

उन्हीं गंगा मां का आशीर्वाद प्राप्त कर प्रचंड बहुमत के साथ नरेंद्र मोदी काशी के सांसद और देश के प्रधानमंत्री बने चार साल गुजर गए. सोमवार को अपने जन्मदिन के दिन पीएम मोदी काशीवासियों के साथ होंगे. इन चार साल में काशी कोे यूं तो कई योजनाएं मिलीं. जिसमें काशी को जापान की धार्मिक नगरी क्योटो की शक्ल देने की जिद भी है और स्मार्ट सिटी बनाने का जज्बा भी. तो वहीं देश का सबसे स्वच्छ शहर बनाने का स्वप्न भी है.

काशी और इसके आसपास के इलाकों में विकास की तकरीबन 24000 करोड़ की परियोजनाएं चल रहीं हैं. साथ ही हृदय योजना के तहत यहां की धरोहरों, ऐतिहासिक स्मारकों के संरक्षण और संवर्धन का काम भी तेजी से चल रहा है. एक नजर डालते हैं पिछले चाल सालों में काशी का होकर पीएम मोदी ने क्या दिया.