जेल में गैंगस्टर ने मनाया जन्मदिन, फोटो वायरल होने पर मचा बवाल

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राजस्थान की जोधपुर सेंट्रल जेल में एक गैंगस्टर मे अपना जन्मदिन केक काटकर मनाया. बाकायदा उसकी पार्टी में अन्य कैदी मेहमान के तौर पर शामिल हुए. बात केवल जेल के अंदर रह जाती तो कोई बात नहीं थी. लेकिन इस पार्टी का एक फोटो वायरल होने से बवाल हो गया. एक वीडियो के भी वायरल होने की ख़बर है. अब अधिकारी मामले की जांच की बात रह रहे हैं.

जोधपुर सेंट्रल जेल को देश के सबसे सुरक्षित कारागारों की सूची में शुमार किया जाता है. वहां कई कुख्यात अपराधी बंद हैं. उसी जेल के वार्ड नंबर 3 में शातिर गैंगस्टर राकेश मांजू भी बंद है. जिसकी फोटो और वीडियो वायरल होने से जेल की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं.

दरअसल, कैदी राकेश ने जेल में अपना जन्मदिन मनाया. इस मौके पर जेल में ही केक भी काटा गया. दूसरे कैदी इस जश्न में मेहमान के तौर पर शामिल हुए. मेहमानों में राजस्थान के चर्चिच भंवरी देवी हत्याकांड के आरोपी दिनेश विश्नोई, परसराम और कैलाश जाखड़ भी शामिल थे.

बीते शनिवार को इस बर्थडे पार्टी के फोटो और वीडियो जब सोशल मीडिया पर वायरल हुए तो जेल प्रशासन में हड़कंप मच गया. आनन फानन में जेल अधिकारियों ने मामले की छानबीन की. जिससे पता चला कि कैदी राकेश मांजू ने जेल प्रशासन से उसके जन्मदिन पर बाहर से केक और मिठाई मंगवाने का आग्रह किया था.

सेंट्रल जेल प्रशासन ने उसके आग्रम को मानते हुए उसे मिठाई और केक मंगाने की इजाजत दी थी. अब यहां तक तो बात ठीक थी. लेकिन जेल में फोटो और वीडियो बनाए जाने के मामले ने जेल सुरक्षा की पोल खोल कर रख दी. बाकायदा बर्थडे पार्टी के फोटो और वीडियो सोशल मीडिया में आ गए.

अब इस बात का जवाब सेंट्रल जेल के अधिकारियों के पास नहीं है कि कैदियों के पास स्मार्ट फोन कैसे पहुंचे. जिनसे फोटो और वीडियो लिए गए और फिर उन्हें सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया गया. जेल के अधिकारी इस सवाल पर बचते नजर आ रहे हैं.

हालांकि जेल अधीक्षक कैलाश त्रिवेदी ने इस मामले पर सफाई देते हुए कहा कि सेंट्रल जेल में बंद कैदियों को खाने-पीने का सामान नियमानुसार तय सीमा तक मंगवाने पर कोई पाबंदी नहीं है. लेकिन जेल में मोबाइल कैसे पहुंचे और फोटो वीडियो कैसे बनाए गए, इस मामले की जांच करवाई जा रही है और जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जाएगी.

फिलहाल, जेल प्रशासन कुछ भी सफाई दे. लेकिन इस मामले ने एक बार फिर ये तय कर दिया कि सुरक्षित जेलों की चारदिवारी के भीतर शातिर अपराधी अपनी हरकतों से बाज नहीं आते. कई ऐसे मामलों ने पहले भी कई जेल अधिकारियों के दावों को हवा में उड़ाया है.


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