किरण बाला – मकरसंक्रांति – साप्ताहिक प्रतियोगिता

लो निकल पड़ी बच्चों की टोली घर-घर जा माँगने लोहड़ी कराने याद दुल्ला-भट्टी की कहानी सुंदरी-मुँदरी गाने की जबानी 
सजे-धजे से खेत और क्यारीइठलाई सी गेहूँ -जौ की बालीपीली धरा झूमे मतवालीचहुँ ओर छाई हरियाली 
नभ में दूर पतंगों की रंगोलीकाटने पतंग वो होड़ा-होड़ी ढोल-नगाड़े संग मतवाली टोलीकहीं भांगड़ा टप्पे और बोली
जले अलाव लो भगाने सर्दी
बंटे तिल, गुड़ गज्जक और मक्कीसजे-धजे से नवयुवक-युवतीहर्षित हृदय और चहुँ ओर है मस्ती
पावन-पुण्य पर्व है लोहड़ी 
सद्भाव-शान्ति का मर्म है लोहड़ी दान-पुण्य की मिसाल है लोहड़ी मधुर मिठास का भाव है लोहड़ी 
है पर्व एक पर विभिन्न है बोली
कहीं संक्रांत तो कहीं बीहू है लोहड़ी कहीं पोंगल तो कहीं खिचड़ी है लोहड़ी संस्कृति की अमिट छाप है लोहड़ी