ज्योति सोनी – मकरसंक्रांति – साप्ताहिक प्रतियोगिता

ठंडी सुबह,अलसाया सूरज लेकर आया “सक्रांति दिवस” छोटे बच्चे भागे चौक में लेकर पतंग और चरखी डोर लुढकाये कंचे कुछ ने, मचाया शोर तिल की गजक, गाजर का हलवा महका चूरमा, लड्डू और पपड़ी का जलवा नव वर्ष का नव उत्साह, नया जोश और त्योहार नया भूल कर जीवन की आपाधापी, देखो पाया रंग नया सनातन परंपरा, भारत भू की, छवि निराली बैठी पीढ़े पर दादी ने बांटे देखो साल दुशाले अनाज भी बांटा और थोड़े बाटे रूपए पैसे दान धर्म और प्रेम का त्यौहार कहलाती सक्रांति निराली अपने बड़ों का पैर छूकर लेते आशीर्वाद छोटे यह मकर सक्रांति का दिवस अद्भुत वरदान दे जाता हर मन को उत्साह से और खुशियों से भर जाता यह जीवन भी हर पल उत्सव है, भूल नहीं तुम जाना हर दुख से हर बाधा से लड़कर इसे मनाना।