झारखंड: पत्थलगड़ी विवाद पर अमित शाह ने सरकार को कड़ाई बरतने के दिए निर्देश

झारखंड में पत्थलगड़ी की समस्या सरकार का सरदर्द बन गई है. झारखंड के आदिवासी बहुल चार जिलों के ग्रामीण इलाकों में हो रही पत्थलगड़ी की खबरों के बाद बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने राज्य सरकार को इस मसले पर कड़ाई बरतने के निर्देश दिए हैं.

बता दें कि राज्य के खूंटी, गुमला, लोहरदगा और चाईबासा इलाकों में कुछ आदिवासी संगठन ना तो स्कूल चलने दे रहे हैं. ना ही सरकारी अधिकारियों को गांवों में प्रवेश करने दे रहे हैं. आदिवासी ग्राम सभा ने फरमान जारी किया कि पत्थलगड़ी किए गए गांवों में ना सिर्फ बाहरी लोगों का प्रवेश वर्जित किया गया है. बल्कि अब इनकी जद में बच्चों के स्कूल भी आ गए हैं. इसके चलते इन दिनों यहां बच्चों की पढ़ाई भी बंद है. वहीं आदिवासी समाज उद्धारकों की मानें तो ये सब कुछ संविधान के तहत कर रहे हैं. इसमें उन्हें यह अधिकार दिया गया है कि वे गांवों में अपना कानून और विधान लागू कर सकते हैं. स्कूलों में अब ग्रामसभा अनुमोदित पाठ्यक्रम ही पढ़ाए जाएंगे.

क्या है पत्थलगड़ी?

पत्थलगड़ी आदिवासियों की प्राचीन परंपरा है. इसमें गांवों के बाहर शिलालेख लगाकर अवांछित लोगों का गांवों में प्रवेश वंचित किया जाता था. इसका इस्तेमाल आदिवासी अपनी जमीन की पहचान के लिए भी करते थे. लेकिन आजादी के बाद संविधान में अनुच्छेद 13, 19(5)(6) के तहत कुछ अधिकार ग्राम सभा को दिए गए थे. अब इसी को गलत तरीके से परिभाषित कर लोगों को सरकारी योजनाओं और अनुदानों का भी बहिष्कार करने के लिए बाध्य किया जा रहा है.

इतना ही नहीं बीते दिनों कुछ ऐसी घटनाएं भी सामने आई हैं, जिनमें ग्राम सभा ने जन्म-मृत्यु प्रमाण-पत्र जारी किया. महज कुछ गांवों में भड़की तथाकथित सरकारी नाफरमानी की यह आग अब तक पांच जिलों को अपनी लपेटे में ले चुकी है. आदिवासी ग्राम सभा में जिस तरह के भड़काऊ बयान दिए जा रहे हैं, उसकी वजह से इन जिलों में कानून व्यवस्था की स्थिति काफी गंभीर हो गई है. पुलिस बिना भारी-भरकम लाव लश्कर के इन गांवों की तरफ रुख करने से भी गुरेज करती है.

बीते दिनों कुछ ऐसी घटनाएं हुई हैं, जिनमें सुरक्षा बलों और अधिकारियों के गांव में प्रवेश करने पर उन्हें रात भर बंधक बनाकर रखा गया था. वहीं इन गावों में मीडिया को जाने से भी रोका जा रहा है. लेकिन ऐसा नहीं है कि सभी गांव ग्राम सभा के इस रुख से इत्तेफाक रखते है.

दूसरी तरफ सरकार इसे महज बीस गांवों की समस्या मान रही है. सरकार इसके पीछे समाज विरोधी तत्वों का हाथ मानती है. गरीब आदिवासी का विकास रोकना चाहते हैं. सूबे के मुख्यमंत्री रघुवर दास, खूंटी के सांसद कड़िया मुंडा, और विधायक नीलकंठ सिंह मुंडा और विकास मुंडा नियमित रूप से अपने क्षेत्रों का दौरा कर रहे हैं. कहीं कोई समस्या नहीं है.

अब तक हो चुकी 16 लोगों की गिरफ्तारी

सूत्रों की मानें तो ग्राम सभा की आड़ में ये सब कुछ सोची समझी रणनीति के तहत किया जा रहा है. इसमें खनिज बहुल आदिवासी जिलों में आदिवासियों को बरगलाया जा रहा है. उन्हें अपने अधिकारों के लिए हिंसा का सहारा लेने की भी जमीन तैयार की जा रही है. इनके पीछे नक्सलियों के साथ- साथ धार्मिक संगठन भी जुड़े हुए हैं.

बता दें कि पत्थलगड़ी की आड़ में इन इलाकों में अफीम की अवैध खेती भी की जा रही है. हलांकि अब सरकार ने देर से ही सही ऐसे लोगों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है. बीते कुछ दिनों में पत्थलगड़ी करने और सरकारी कर्मचारियों के कार्य में बाधा उत्पन्न करने के आरोप में 16 लोगों की गिरफ्तारी हुई है. इनमें आदिवासी ग्राम सभा के अध्यक्ष विजय कुजूर और महासचिव कृष्णा हांसदा भी शामिल हैं. इनपर राजद्रोह के साथ-साथ राष्ट्रद्रोह का भी मुकदमा दर्ज किया गया है.