झारखंड बंद: 8 हजार आंदोलनकारी गिरफ्तार, सीएम बोले- विफल रहा

झारखंड में भूमि अधिग्रहण संशोधन बिल के खिलाफ गुरुवार को विपक्ष ने प्रदेश बंद का आह्वान किया. इस बिल को राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद से ही सूबे की राजनीति में उबाल है. वैसे विपक्ष की ओर से बुलाए गए बंद से निपटने के लिए पुलिस-प्रशासन ने भी कड़े इंतजाम किए हैं.

गुरुवार को झारखंड की बीजेपी सरकार के भूमि अधिग्रहण के खिलाफ विपक्षी दलों का प्रदेश बंद असरदार रहा. राज्य के लगभग सभी  हाईवे जाम किए गए. कोयला ढोने वाले वाहनों की सड़कों पर कतार नजर आ रहा है. वहीं, स्थानीय प्रशासन भी शांति व्यवस्था को लेकर मौके पर मुस्तैद नजर आ रहा है. पुलिस के साथ नेताओं की नोकझोंक और एकाध जगह हंगामा को छोड़कर यह बंद शांतिपूर्ण तरीके से किया जा रहा है.

बंद समर्थकों से निपटने और शांति व्यवस्था बिगड़ने से रोकने के लिए जगह-जगह सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है. जिन इलाकों में उपद्रव होने की आंशका है, वहां सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं.

इस भूमि संशोधन बिल से पूंजीपतियों को होगा फायदा : विपक्ष

विपक्ष प्रदेश की रघुबर दास सरकार की नीतियों को लेकर खफा है. उनका मानना है कि CNT/SPT एक्ट में संशोधन कर सरकार आदिवासियों की भूमि उनसे छीनने का काम कर रही है. साथ ही विवादास्पद भूमि अधिग्रहण कानून के सहारे उनकी वनभूमि को कॉरपोरेट घरानों को विकास के नाम पर देने की साजिश रच रही है.

आदिवासियों का मानना है कि यहां के निवासी होने की वजह से जल, जंगल और जमीन पर पहला अधिकार उनका बनता है. वहीं कुछ संगठन इन मुद्दों की आड़ में आदिवासियों को बरगलाकर सरकार विरोधी हवा भी बनाने में लगे हैं. मालूम हो कि 12 अगस्त 2017 को ही  विधानसभा में इस संशोधन को ध्वनिमत से पारित करा लिया गया था और विपक्ष की कुछ भी नहीं सुनी गयी थी.

इससे राज्य में विकास के नए द्वार खुलेंगे: बीजेपी

सूबे की सत्तारूढ़ पार्टी बीजेपी के मुताबिक इस भूमि संशोधन बिल से राज्य में विकास के नए द्वार खुलेंगे. आदिवासी की जमीन ट्रांसफर करने जैसी कोई बात नहीं है. राज्य सरकार के मुताबिक भूमि अधिग्रहण कानून में संशोधन प्रस्ताव किसी उद्योगपति या पूंजीपति के लिए नहीं लाया गया है, बल्कि अस्पताल, स्कूल ,सड़क, पंचायत भवन, आंगनबाड़ी और ट्रांसमिशन लाइन जैसी योजनाओं के तेजी से कार्यान्वयन के मकसद से लाया गया है.

सरकार का कहना है कि भूमि अधिग्रहण से प्रभावित होने वाले लोगों को निश्चित तौर पर चार गुना मुआवजा मिले. साथ ही राज्य सरकार के मुताबिक संशोधन में स्पष्ट है कि स्थानीय निवासियों की सहमति से ही भूमि ली जाएगी. विरोध कर रहे विपक्ष को चुनौती देते हुए बीजेपी का कहना है कि अब कानून का सरलीकरण हुआ है. शेड्यूल एरिया तो इससे प्रभावित भी नहीं होंगे.

खास तौर पर आदिवासियों की जमीन लेने जैसी कोई बात नहीं है. इस सरलीकरण में शेड्यूल एरिया को टच नहीं किया गया है. पहले सोशल ऑडिट में दो-तीन साल लग जाते थे. अब सरलीकरण के बाद छह से आठ महीने लगेंगे. भूमि अधिग्रहण कानून की धारा 341 के तहत शेड्यूल एरिया को टच नहीं किया गया है. वैसे इस संशोधन में भूमि अधिग्रहण कानून 2013 की धारा 2 की उप धारा दो और तीन का सरलीकरण किया गया है.

सीएम बोले- पूरी तरह विफल रहा बंद

झारखंड में विपक्ष के प्रदेश बंद पर मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा कि ये बंद पूरी तरह फेल रहा है. जनता ने इसे नकार दिया है. मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि ये दल एकसाथ बंद तो जरूर बुलाए थे, लेकिन इनमें एकजुटता नहीं है और यही वजह है कि सभी अल-थलग ही रहे.

गौरतलब है कि राज्‍य से अब तक जो आंकड़े मिले हैं, उसके अनुसार लगभग आठ हजार बंद समर्थकों को गिरफ्तार किया गया है. पुलिस द्वारा जो जानकारी दी गयी है, उसके मुताबिक रांची में 1719, जमशेदपुर में 1942, धनबाद में 1134 लोग हिरासत में लिए गए हैं. इसके अलावा चाईबासा में 323, सरायकेला में 525 और कोल्‍हान में 2790 बंद समर्थकों को हिरासत में लिया गया है. फिलहाल बंद समर्थकों को गिरफ्तार कर कैंप जेल में रखा गया है.

रघुवर दास ने कहा कि राज्य में विपक्षी दलों का नजरिया विकास विरोधी है. जनता ने बंदी को नकार दिया है. साल 2019 के चुनाव में नकारत्मक सोच वाले विपक्ष को जनता सबक सिखाएगी. भूमि अधिग्रहण पर विपक्ष भ्रम फैला रहा है. कानून में कोई छेड़छाड़ नहीं किया गया है. बस सरलीकरण किया है, जिनकी जमीन जाएगी, उन्हें आठ महीने में मुवावजे मिल जाएगा. खूंटी में सुधार हो रहा है, वहां भी जनता जग गई है. कानून के साथ खिलवाड़ करने का किसी को अधिकार नहीं है.