डॉ. प्रवीण कुमार श्रीवास्तव – जवान/फौजी/सैनिक – साप्ताहिक प्रतियोगिता

राष्ट्रीय हिंदी साहित्य साप्ताहिक प्रतियोगिता 2020
“विधाता “छंद पर आधारित,
“गीतिका” मुक्तक।

राष्ट्र के तुम प्रथम प्रहरी ,राष्ट्र का सम्मान हो ।
देश के तुम सजग सैनिक ,देश की तुम आन हो।
हे शहीदों!राष्ट्र की तुम नींव रखते जा रहे ,
हे जवानों! सैन्य वीरों !देश की तुम शान हो ।

देश को जग में अकेला, छोड़ सैनिक चल दिये।
मातु का आशीष लेकर ,वीर फौजी चल दिये ।
देशहित कुमकुम निछावर कर दिया अब मातु ने,
राष्ट्रहित बलिदान करने ,प्राण रण में चल दिये।

वीर मिलते हैं जहां पर ,वीरता से साथियों।
धीर मिलते हैं वहां पर, धीरता से साथियों।
हे जवानों !फौजियों! तुम शूरता की माप हो,
देशहित बलिदान होते, तुम सदा ही साथियों।

फौजियों के साथ मिलकर, फौज के हमराज हो।
वीरता के तुम पथिक हो ,वीर पथ पर आज हो।
तुम प्रलय के गीत बनकर गूँजते ब्रह्मांड में,
सैनिकों के सैन्य बल पर, हम सभी को नाज हो ।

देशहित करते निछावर ,प्राण, तुमको है नमन ।
गोलियों के साथ खेले ,शूरवीरों ,है नमन।
वीरता के इस समर में, दे रहे आहुति सभी,
हे! शहीदों, हे! जवानों, राष्ट्र करता है नमन।

प्रस्तुत रचना, मेरी स्वरचित, व मौलिक रचना है।