डॉ बी निर्मला – कर्नाटका – फागुन का महिना,प्यार का महिना,फरवरी

फागुन का महिना,प्यार का महिना,फरवरी

फागुन का महिना,प्यार का महिना,फरवरी

माघ के बाद,आया फागुन का महीना,फरवरी साथ लाया, प्यार का महिना।
चारों ओर प्रकृति की छठा देखते बनती,बगियों में रंग बिरंगे खिले फूल सबका मन मोह लेती।
न ठंड,न गर्मी,ऐसा मौसम सबको अच्छा लगता,बच्चे,युवा,सबको आनंद उठाने का मन करता।
हिन्दू पंचांग में फागुन,साल का आखरी महिना,आनंद और उल्लास का महीना,जिसमें होली का पावन पर्व मनाया जाता,
अंग्रेजी कैलेंडर में साल का, सर्दी का आखरी महिना,फरवरी,चौदह तारीख को वेलेंटाइन डे,रोमन पर्व से संबंधित,मनाया जाता।
आधुनिक काल में इसे प्यार का महिना कहते,इस दिन लोग एक दूसरे को कार्ड,चॉकलेट,पुष्प, उपहारों की भेंट देकर,प्यार का इजहार करते।
विदेशी संस्कृति की देन,अब हमारे देश में प्रचलित हो चली, युवा पीढ़ी इसका अनुसरण कर इसके पीछे अंधाधुंध भाग रही।
जी हां ये तो लव,प्यार का महिना, केवल प्यार का,वो प्यार जो है बहुत गहन,अनमोल,विशाल जिसमें समाया त्याग,बलिदान और जन्म जन्म का बंधन ।
हमारे देश में इस प्यार का अर्थ केवल स्त्री- पुरुष नहीं,वरन् माता – पिता,भाई – बहन,पति – पत्नी, और भी पारिवारिक,सामाजिक संबंधों के रूप में मान्य और निभाए जाते है,जो केवल हमारी, भारतीय संस्कृति में है।