दिल्ली न सही, संसद तो हो गई वाई-फाई से लैस, होंगे ये फायदे

केजरीवाल सरकार के वादे के मुताबिक राजधानी दिल्ली के कोने-कोने में भले ही वाई-फाई न लग पाया हो, लेकिन नई दिल्ली इलाके में स्थ‍ित संसद भवन वाई-फाई व्यवस्था से लैस हो गया है. संसद के मॉनसून सत्र की बुधवार से शुरुआत हो गई है. इस सत्र में कई महत्वपूर्ण बिल पारित किए जाने हैं.

नई व्यवस्था पर्यावरण के लिहाज से काफी उपयुक्त मानी जा रही है, क्योकि इससे कागज की काफी बचत होगी. हालांकि सदन में इंटरनेट नहीं बल्कि इंट्रानेट की व्यवस्था की गई, जिसके द्वारा संसद की लाइब्रेरी और अन्य कुछ स्रोत से हासिल जानकारी सांसदों को अपने मोबाइल आदि पर वाई-फाई के द्वारा मिल सकेगी.

गौरतलब है कि सुरक्षा कारणों की वजह से संसद में ऐसे जैमर लगाए गए हैं, जिनकी वजह से दोनों सदनों के भीतर मोबाइल का सिग्नल नहीं पकड़ता. अभी तक संसद के हर बिल, संशोधन, स्थायी समिति की रिपोर्ट आदि की कागज में छपी प्रतियां कार्यवाही के दौरान सांसदों को वितरित की जाती हैं, क्योंकि उनको मोबाइल, टैबलेट या लैपटॉप पर नहीं देखा जा सकता.

चर्चाओं के दौरान सांसदों को लाइब्रेरी जाकर रिसर्च मटेरियल का प्रिंट आउट निकलवाना पड़ता है और उसे लेकर फिर से सदन के अंदर आते हैं. किसी मंत्री को यदि लगता है कि अपने तर्कों को वजन देने के लिए उसे कुछ और सामग्री की जरूरत है तो वह फिर दौड़कर लाइब्रेरी में जाता है और वहां से प्रिंट लेता है.

कई बार‍ मंत्रियों को जरूरी डेटा उपलब्ध न करा पाने की वजह से सदन के गुस्से का भी सामना करना पड़ता है. सांसद भी अक्सर यह शिकायत करते देखे जाते हैं कि उन्हें किसी बिल या संशोधन की कॉपी नहीं मिली.

लेकिन अब संसद भवन में वाई-फाई आधारित इंट्रानेट की व्यवस्था कर दी गई है. सभी सांसद और मंत्री यदि इसका फायदा उठाएं तो बड़ी मात्रा में कागज की बचत हो सकती है.

असल में लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महजान ने करीब एक पखवाड़े पहले आईटी मंत्रियों के साथ बैठक में यह प्रस्ताव रखा था कि सदन में कागज के इस्तेमाल की कटौती के लिए पर्यावरण अनुकूल उपाय किए जाएं. उन्होंने इसके लिए 18 जुलाई की डेडलाइन भी तय कर दी थी.