दिल्ली: पुलिस ने फर्जी केस में फंसाया, दिया थर्ड डिग्री टॉर्चर

राजधानी दिल्ली में नागरिकों की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार पुलिस का बेरहम चेहरा सामने आया है. आरोप है कि पुलिस ने एक बेकसूर व्यक्ति को फर्जी केस में फंसाया, ब्लैकमेल कर पैसे मांगे और पैसे न मिलने पर हिरासत में थर्ड डिग्री टॉर्चर दिया. इतना ही नहीं पुलिस ने फर्जी मेडिकल रिपोर्ट पेश कर कोर्ट को भी गुमराह करने की कोशिश की. इसके अलावा पुलिस ने पीड़ित को उसके घर से हिरासत में लिया, जबकि FIR में रिठाला मेट्रो स्टेशन से गिरफ्तारी दिखाई.

पीड़ित की पत्नी ने दिल्ली पुलिस के अधिकारियों समेत अन्य विभागों में लिखित शिकायत देकर न्याय की मांग की है. साथ ही आरोपी पुलिसकर्मियों को बर्खास्त कर कानूनी कार्रवाई की मांग की है. जिले के डीसीपी का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है और दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.

यह है पूरा मामला

पीड़ित नवीन कुमार उर्फ मोनू वेस्ट दिल्ली के शाहाबाद इलाके का रहने वाला है. नवीन की पत्नी ने बताया कि इसी महीने उसके पति के दोस्त सूर्या का किसी से कोई मामला हुआ था, जिसमें सूर्या को पुलिस के सामने पेश हो गया था. सूर्या से मिलने नवीन कभी-कभी थाने चला जाया करता था.

नवीन 6 अप्रैल की सुबह करीब 10.15 बजे घर के सामने खड़ी अपनी कार में बैठकर फोन पर बात कर रहा था. तभी वहां कुछ पुलिस वाले आए और नवीन को जबरन उठाकर ले गए. घर के बाहर लगे सीसीटीवी कैमरे में पुलिस वालों की यह हरकत कैद हुई है. पुलिस वालों से पूछने पर उन्होंने परिवार वालों को कुछ नहीं बताया.

गिरफ्तारी की जगह भी गलत दिखाई

नवीन की पत्नी ने बताया कि पुलिस वालों ने एफआईआर में गिरफ्तारी की जगह भी गलत दिखाई है. सीसीटीवी में दिख रहा है कि नवीन को उसके घर के सामने कार में से निकालकर पुलिस अपने साथ ले गई, जबकि पुलिस ने एफआईआर में नवीन की गिरफ्तारी 6 अप्रैल को ही शाम 7.15 बजे रिठाला मेट्रो स्टेशन से दिखाई है.

छोड़ने के लिए मांगे 5 लाख रुपये

नवीन को शाहाबाद डेयरी के मेट्रो विहार पुलिस चौकी में रखा गया और किसी को भी मिलने नहीं दिया गया. इस बीच दो से तीन पुलिस वाले नवीन के घर पहुंचे और फोन पर किसी से बात करवाई. फोन पर बात करने वाले व्यक्ति ने नवीन के परिवार वालों से पांच लाख रुपए की मांग की.

नवीन की पत्नी ने जब पैसे देने में असमर्थता जताई तो रकम घटाकर 3 लाख रुपये कर दी गई. हालांकि नवीन की पत्नी ने पुलिस को पैसे देने से साफ इनकार कर दिया. इस बीच नवीन को थाने में बंद रखा गया. रात को जब परिवार वाले चौकी में थे, कुछ पुलिस वाले आए और सभी को बाहर निकाल दिया.

कुछ ही देर बाद नवीन की चीखने-चिल्लाने की आवाजें आने लगीं. नवीन के बड़े भाई और मामा ने पुलिस कंट्रोल रूम को छह से सात बार फोन कर शिकायत करने की कोशिश की. थोड़ी देर में एक पीसीआर समेत पुलिस अधिकारी भी मौके पर पहुंचे, लेकिन किसी ने कुछ नहीं किया.

बनवाया फर्जी मेडिकल रिपोर्ट

नवीन की बुरी तरह पिटाई करने के बाद पुलिस वाले उसे महर्षि वाल्मिकी अस्पताल ले गए. पुलिस ने अस्पताल से जो मेडिकल रिपोर्ट बनवाई उसमें नवीन के जख्मों को दो दिन पुराना दिखाया गया. इसके बाद उसी रात नवीन के खिलाफ पिस्टल के साथ पकड़े जाने का मामला दर्ज कर लिया गया.

अदालत ने खुद लिया संज्ञान

अगले दिन जब पुलिस ने नवीन को रोहिणी कोर्ट में पेश किया तो नवीन जज के सामने गिर पड़ा. जज ने नवीन का संजय गांधी अस्पताल में दोबारा मेडिकल कराने का निर्देश दिया. जब संजय गांधी अस्पताल से मेडिकल रिपोर्ट आई तो पुलिस की मेडिकल रिपोर्ट झूठी साबित हो गई.

पीड़ित के घरवालों ने भी जज के सामने पुलिस की पूरी कारस्तानी बयां कर दी. घरवालों ने बताया कि चौकी इंचार्ज पुनीत ग्रेवाल, IO प्रवीण तोमर और हेड कांस्टेबल कृष्णा ने धमकी भी दी है कि अभी तो आर्म्स ऐक्ट में फंसाया है, अगर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की तो अंजाम अच्छा नहीं होगा.