दिल्ली सरकार द्वारा नियुक्त फैक्ट-फाइंडिंग कमेटी की रिपोर्ट में विश्वसनीयता की कमी है – दिल्ली कांग्रेस

दिल्ली कांग्रेस द्वारा श्री हारुन यूसुफ जी की अध्यक्षता में गठित फैक्ट फाईंडींग कमिटी ने आज अपना रिपोर्ट दिल्ली कॉंग्रेस के सामने प्रस्तुत किया.

रिपोर्ट में दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग द्वार दंगों पर पेश किए गए रिपोर्ट को अध्ययन करने के बाद उसपर अपनी प्रतिक्रिया दी है.

हमारी फैक्ट फाईंडींग कमिटी का कहना है कि

-उत्तर पूर्वी दिल्ली के सांप्रदायिक दंगों की जांच वाली फैक्ट-फाइंडिंग कमेटी की रिपोर्ट में विश्वसनीयता की कमी।

-रिपोर्ट में भाजपा और आप पार्टी को दोष से मुक्त करने का प्रयास।

-दिल्ली कांग्रेस उत्तर पूर्वी दिल्ली दंगों की न्यायिक जांच की मांग।

– आयोग के माध्यम से अरविन्द सरकार द्वारा गठित फैक्ट फाईंडिंग कमेटी एक कमजोर और निष्क्रिय कमेटी।

-फैक्ट फाइंडिंग कमेटी के पास जांच के संबध में दिल्ली पुलिस को बुलाकर पूछताछ करने का नहीं है कोई कानूनी अधिकार।

-दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग के एक सदस्य को फैक्ट फाईडिंग कमेटी से बाहर करने का किया गया था।

-यदि अरविन्द सरकार उत्तर पूर्वी दिल्ली के दंगों के दोषियों को पकड़ने के लिए संवेदनशील होती तो एक सेवानिवृत न्यायधीश के नेतृत्व में इसकी न्यायिक जांच कराती।

-डीएमसी चेयरमैन के रिपोर्ट से स्पष्ट है कि “दिल्ली पुलिस के असहयोग के कारण, फैक्ट-फाइंडिंग कमेटी अधिक व्यापक और निर्णायक रिपोर्ट पेश नहीं कर सकी”।

-फैक्ट-फाइंडिंग कमेटी के रिपोर्ट में नहीं है सम्पतियों क्षतिपूर्ति और जान जाने का आंकड़ा

-दंगे के समय प्रशासन की भूमिका, दंगा क्षेत्र में तैनात प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका पर भी उठते हैं सवाल।

-दिल्ली कांग्रेस द्वारा गठित फैक्ट फाईडिंग कमेटी की रिपोर्ट ने सवाल उठाया है कि सांप्रदायिक हिंसा के लिए उकसाने वाले भाजपा नेताओं के खिलाफ एफआईआर क्यों नहीं दर्ज की गई।

-क्यों भाजपा और आम आदमी पार्टी के निर्वाचित प्रतिनिधियों की भूमिकाओं की जांच फैक्ट-फाइंडिंग कमेटी द्वारा नहीं की गई?

अरविंद केजरीवाल को जरा भी अगर ईमान बचा है तो माफ़ी माँगनी चाहिए.