देखो फागुन का आया महीना – रेणु झा

फागुन का महीना (गीत)

देखो फागुन का आया महीना
गजब सी खुमारी चढ़ी है,
रंगों उमंगों से देखो
फागुन की मस्ती बढ़ी है
देखो फागुन का आया महीना
गजब सी खुमारी चढ़ी है।

कहीं सरशों झूमें खेतों में
कहीं अनाजों की बालियां सजी हैं
फूल मंजरों की खुशबू लेकर
फागुन मचल उठी है
देखो फागुन काआया महीना
गजब सी खुमारी चढ़ी है।

ये कैसी फागुन की
मस्ती है छाई,कि
हर बूड्ढा कहे, मैं देवर
हर मनचला बन रहा बहनोई।
देखो फागुन का आया महीना
गजब की खुमारी चढ़ी है।

कलियां भी चटकने लगी है
भवरें भी मचलने लगे हैं,
गोरी के नयनों में देखो
इंतजार साजन की बढ़ी है,
आसमां में उड़ते गुलाल हैं
जमीं रंगों से रंगी है।
देखो फागुन का आया महीना
गजब सी खुमारी चढ़ी है।

जब वसंत की चली पूरवाई
शरहद पर हो रही घर जाने
की तैयारी,
चलो अपनों के बीच अब तो
अपनों से ही फागुन की खुशी है,
देखो फागुन का आया महीना
गजब सी खुमारी चढ़ी है,
रंगों उमंगों से देखो
फागुन की मस्ती बढ़ी है,
देखो फागुन का आया महीना
गजब सी खुमारी चढ़ी है।