देवेन्द्र प्रसाद – गणतंत्र दिवस, संविधान– साप्ताहिक प्रतियोगिता

दिवस 26 जनवरी, इस तिरंगे की शान है।
गणतन्त्र की निशानी, यह संविधान है।।

गोरों को भगाने में, वो शहीद हो गये।
भारत की लाज के, वो सभी निगेहबान हैं।।

माँओं ने लाल खोया, बहनो ने पीर पायी।
फट कर कलेजा हुआ, तब लहूलुहान है।।

हमको मिली आजादी, वीरों के कर्म से।
माटी को पुजता, हर घर में किसान है।।

अनमोल बेटियां है, झांसी की रानी जैसे।
आजाद, भगत सिंह, हर नौजवान है।।

शिक्षा भी मिल रही, मेरा देश बढ़ रहा।
ना ही कोई समस्या, अब समाधान है।।

हिन्दू और मुसलमान, सभी सिख इसाई।
मिल जुल के जहां रहें, वो हिन्दुस्तान है।।

वीरों को नमन कोटि, आज अमर पर्व पर।
सब गर्व से प्रफुल्लित, हुये कद्रदान हैं।।