देवेन्द्र प्रसाद – नव वर्ष – साप्ताहिक प्रतियोगिता

आशा और विश्वास से, शुरु नया साल हो।
तिमिर सारे छंट जाये, सभी खुशहाल हो।।
बच्चे पढ़ें, बूढ़े हंसे, सबको रोजगार मिले।
दादी व नानी वाला, अच्छा संस्कार मिले।।
मीरा, कबीर बसें, दिनकर व निराला हों।
चारो तरफ यहां, वैभव का ही उजाला हो।।
रीति, संस्कृति व सत्कर्मो का गुणगान हो।
रहे निजता सुरक्षित, ना कोई परेशान हो।।
भारत की माटी मे, शूरवीरों का अवतार हो।
विपत्तियों से लड़ने को, हम सब तैयार हों।।
ज्ञान, सद्बुद्धि मिले, किसी को न क्लेश हो।
भारत विश्वगुरु बनेे, हर भारतीय विशेष हो।।