देवेन्द्र प्रसाद – मकरसंक्रांति – साप्ताहिक प्रतियोगिता

स्वंय दिनकर की पावन छवि,
जब मकर रेखा पर आती है।
हर्ष, उल्लास सब छा जाता है,
सबकों खुशियां मिल जाती हैं।
खिचड़ी, लोहड़ी और पोंगल,
भोगाली बिहु, माघी कई नाम।
स्नान, ध्यान सब करने पर ही,
शुरु करे खुश होकर के काम।
जप, तप, दान, ध्यान, अर्पण,
श्राद्ध कर्म सब करते मन से।
भास्कर को दिल में बसाकर,
खुशियां देते मिल सब जन से।
तिमिर से प्रकाश को उन्मुख,
अद्भूत दिवस का है त्योहार।
रीति, प्रीति, व शुद्ध वचन से,
पावन कर देता है व्यवहार।
मकर राशि के स्वामी हैं शनि,
पिता है जिनके रवि महान।
कष्ट कटे, सुख मिले अनंता,
मन से करे जो इनका ध्यान।
गंगा स्नान जो इस दिन करे,
कटे, मिटे सब जन के पाप।
महिमा लोहड़ी की है अनंत,
नही इसका है छोटा परिमाप।