धोनी ने ही सुझाई थी A+ कैटेगरी और खुद ही हो गए इससे बाहर

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भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने नई ग्रेड ए+ श्रेणी की शुरुआत की है, जिसमें कप्तान विराट कोहली सहित 5 खिलाड़ियों को जगह दी गई है. ग्रेड ए+ में शामिल क्रिकेटरों को बोर्ड सालाना 7 करोड़ रुपये का भुगतान करेगा. लगातार अच्छा प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को ग्रेड ए+ श्रेणी से पुरस्कृत करने का सुझाव खुद पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी और मौजूदा कप्तान विराट कोहली ने दिया था.

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दरअसल, टीम इंडिया के पिछले मुख्य कोच अनिल कुंबले ने पे स्ट्रक्चर (भुगतान संरचना) पर पहल की थी. सबसे पहले उन्होंने वरिष्ठ खिलाड़ियों से बात की और फिर इसे सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित क्रिकेट प्रशासकीय समिति (सीओए) समक्ष रखा था.

कुंबले ने पिछले साल मई में कोच पद छोड़ने से एक महीना पहले सीओए और बीसीसीआई के शीर्ष पदाधिकारियों के सामने नए सैलरी स्ट्रक्चर पर प्रेजेंटेशन भी दी थी. उस कुंबले मॉडल में 5 करोड़ के टॉप कॉन्ट्रैक्ट की बात रखी गई थी.

इसके बाद सीएओ का खिलाड़ियों के वेतन वृद्धि मसले पर कोहली, धोनी, रोहित शर्मा और टीम इंडिया के मुख्य कोच रवि शास्त्री के साथ बैठकों का दौर चला. आखिरकार दिसंबर में खिलाड़ियों ने ए+ श्रेणी अनुबंध की सिफारिश कर दी.

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सीओए अध्यक्ष विनोद राय एक इंटरव्यू में कह चुके हैं कि यह सुझाव धोनी और विराट की तरफ से आया था. ये दोनों ए+ कैटेगरी को शानदार प्रदर्शन करने वालों के लिए रखना चाहते थे. उनका तर्क था कि इस श्रेणी में केवल उन्ही खिलाड़ियों को रखा जाए, जो तीनों फॉर्मेट में खेल रहे हों और टॉप-10 रैंकिंग में हों.

यानी, जिन 5 को शीर्ष श्रेणी में रखा गया है वे अभी तीनों प्रारूप में खेल रहे हैं. वे ज्यादा वेतन पाने के हकदार हैं. और इस आधार पर धोनी ए+ केटेगरी से बाहर हो गए. उन्हें दूसरी दूसरी श्रेणी- ग्रेड ए मिली. इस श्रेणी में ऐसे खिलाड़ी शामिल हैं, जिनका एक प्रारूप में खेलना तय है.

धोनी टेस्ट से संन्यास ले चुके हैं. अश्विन और जडेजा सीमित ओवरों में चयन के दावेदारों में नहीं रह गए हैं. साहा और पुजारा केवल टेस्ट मैच में खेल रहे हैं. इसलिए इन सभी को दूसरी श्रेणी में रखा गया है. जाहिर है ‘अधिक मैच खेलो और अधिक वेतन पाओ’ की तर्ज पर ग्रेड का निर्धारण किया गया है.


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