पवन कुमार गौतम – नव वर्ष – साप्ताहिक प्रतियोगिता

नववर्ष मनाकर विश्व पटल पर काव्य
का गुंजन कर ले।
स्वर वीणा के संग में हम भी माँ शारद
वन्दन कर ले।

माँ सरस्वती का आराधन हम सबजन
मिलकर गाएंगे।
संग में साहित्य मंगलकर अरु छंद विधान
सजायेंगे।।
मन से तन से और जीवन से साहित्य
का सन्धान करे।
जो है समाज मे व्याप्त त्रुटि को निज
लेखन से निदान करे।।

सब मिल जुल कर वीणा वाणी का
ध्यान करे पूजन कर ले।।
नववर्ष मनाकर विश्व पटल पर काव्य
का गुंजन कर ले।।

रस छन्द अलंकृत नवरचना को प्रति दिन हमको
लिखना है।
माँ हंसवाहिनी सलिला की धारा के संग
संग बहना है।।
तीन लोक और सप्त खण्ड सब भुवन
में गीत प्रवाहित हो।
अपने मन चित्त अरु प्राण तलक भव भाव
बिम्ब समाहित हो।।

अंतिम पंक्ति की अन्तिमता तक त्याग
करे मंथन कर ले।
नववर्ष मनाकर विश्व पटल पर काव्य
का गुंजन कर ले।।

सरिता प्रवाह कविता धारा में जी भर
कर स्नान करे।
उस दिव्य पुंज की मधुर गूँजमें पुलकित
हृदय तमाम करे।।
मा हंसवाहिनी का रथ आकर सन्मुख द्वारे
खड़ा हुआ।
होकर सवार जीवन पथ पर गौतम ले
पोथी अड़ा हुआ।।

व्योम पत्र पर विटप क़लम सिंधु स्याही
अर्पण कर ले।
नववर्ष मनाकर विश्व पटल पर काव्य
का गुंजन कर ले।।