पवन गौतम – मकरसंक्रांति – साप्ताहिक प्रतियोगिता

कहीं पतंग उड़ाई जाए।
कहीं लावणियां झलकाए।
सूरज अपनी दिव्य छटा को..
जन जन तक रश्मि पहुँचाए।
नए वर्ष में खुशियाँ लाए……
सबको मकर सक्रांति भाए।।
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कहीं लाहिड़ी नाम पुकारे।
पोंगल कहकर इसे उचारे।
स्वर्ण भास्कर हो उतरायण…
विवस्वान मार्तण्ड नज़ारे।

फसलें खेतों में लहलाए…….
सबको मकर संक्रांति भाए।।
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सूर्य दिवाकर का उजियाला।
आदित्य, दिनकर बन मतवाला।
रश्मिरथी दिनेश की आभा……..
दूर करे सारा अँधियारा।

तिथि ऋतु मौसम चक्र चलाए……
सबको मकर संक्रांति भाए।।