प्यार का महीना – अनंतराम चौबे – मध्यप्रदेश

प्यार का महीना

फागुन का महीना आया है
प्यार का भी महीना आया है ।
बसंत ऋतु का मौसम आया है
फ़रवरी का महीना आया है ।

खेतों में हरियाली देखो
हरी मखमली चादर लगती
वसुन्धरा में बिछी हुई है
कितनी सुन्दर प्यारी दिखती ।

पीली पीली सरसों फूली
फागुन का ये महीना है ।
प्यार का मौसम सुहाना है
फागुन का जो  महीना है।

गोरी चलती खेतों की राह में
पायल छम छम छम करती है ।
अल्हड़ भागती जाने क्या सोचती
तिरछी नजर से यौवन को देखती ।

बसंती हवायें यौवन को छेड़ती
फागुन के इस सुहाने महीने में ।
साजन के सपनों को संजोती
फागुन के प्यार के, इस महीने में ।

आम बौराए अमराईयों में
कुहू कुहू करती कोयल है ।
तड़पती प्यार में साजन को
गोरी मन ही मन में घायल हैं ।

पतझड़ ऐसा लगा हुआ है
फागुन का आया महीना है ।
प्यार को पाने घायल गोरी
प्यार का आया ये महीना है ।

भंवरे गुंजन करते शोर मचाते
फूलों कलियों का रस हैं चूसते ।
फागुन का महीना ये आया है
सुन्दर सुहाना मौसम आया है ।