प्रामिज डे – देवेन्द्र प्रसाद

गज़ल

इश्क में तनिक इन्तज़ार कर लूं
तन्हाइयों से थोड़ा आंखे चार कर लूं

चाह तो है कि ख़िल्वत में गुफ्तगू होवे
पहले तो खुद को बेकरार कर लूँ

दिल धड़कता है नाम उसका आने पर
दिल की चिंगारी को अंगार कर लूं

बेमिसाल प्यार में कुछ लोग जो हुए
ख़ुदसताई मैं भी कई बार कर लूं

फ़ुर्क़त होने न दुगां , ये मेरा वादा है
पहले तो उसका आज दीदार कर लूँ

ख़िल्वत- एकान्त
ख़ुदसताई- आत्मप्रशंसा
फ़ुर्क़त- जुदाई

देवेन्द्र प्रसाद
Devendra Prasad
Assistant Professor
Feroze Gandhi College, Rae Bareli, up

स्थायी पता- मऊ, उत्तर प्रदेश