प्रीति. एम – बेरोजगारी – साप्ताहिक प्रतियोगिता

यक्ष-युद्धिष्ठिर संवाद में जब यक्ष ने युद्धिष्ठिर से पूछा था कि कौन-सी वस्तु
सबसे भारी होती है..? तब युद्धिष्ठिर ने उत्तर दिया था कि पाप सबसे भारी
होता है…| मगर नहीं साहब; रुकिए…! कलयुग कि सबसे खतरनाक, जानलेवा
बीमारी और अत्यधिक भारी वस्तु होती है – बेरोजगारी| जिसे बीमारी कि बजाए
अभिशाप कहना अतियुक्त होगा| खाली जेब का वजन सबसे भारी होता है जिसे
लेकर चलना तिल-तिलकर मरने के समान होता है| इसका दर्द बाँटने से कम
होता हो, ऐसा कभी नहीं देखा गया| इसकी सच्ची तस्वीर देखनी हो तो उस
औरत से पूछिए जिसका पति बेरोजगार हो…|
यह बीमारी आत्मविश्वास, मान-प्रतिष्ठा, भूख-प्यास, रातों की नींद, घर का
सुख-चैन और पारिवारिक शांति-समृद्धि सब छीन लेती है| अब तो इसका रूप
इतना विभस्त हो गया है कि इसने समाज की जड़े काटते हुए आतंक का रूप
भी ले लिया है| यह छुआछूत की बीमारी नहीं है, मगर समाज के किसी भी वर्ग
में किसी को भी अपना शिकार बना सकती है| हमारे देश में तो यह बहुत
अधिक मात्रा में पाई जाती है|
बुद्धिजीवी इसका मुख्य कारण जनसंख्या और अशिक्षा बताते हैं| आजकल के
चलन के अनुसार अगर झूठी चापलूसी और चमचागिरी नहीं की तो नौकरी से
हाथ धोना पड़ता है| ऐसी परिस्थिति में भी यह बीमारी हो जाती है|
इसकी दवा दवाखाने में नहीं मिलती| इस अभिशाप को समाज और देश मिलकर
ही दूर कर सकता है| सरकार को जहाँ रोजगार सृजन के लिए प्रभावी रणनीति
तैयार करनी चाहिए वहीँ समाज के दूसरे लोगों को चाहिए कि इस अभिशाप से
ग्रस्त लोगों को थोड़ी भावनात्मक संवेदना और सहारा दे सकें|