फ़रवरी – रेणु बाला धार

फ़रवरी नही बस इक माह फरवरी
दिल वालों की चाह फ़रवरी ,
बरसाता प्रेम अथाह फ़रवरी
रोज दिखाता‌ ‌नई राह फ़रवरी ं
सालक्रम में दुसरा नम्बर होता है
आकार में सबसे छोटा होता है ,
ये लीपईयर में इक दिन बढ़ता है
फिर भी हर साल सबसे छोटा है़ ़ कहता फ़रवरी अन्य माह से
बड़े कद का ना रख सुरूर ,
बड़े हुए तो क्या हुआ
तू तो बस है पेड ‌खजूर
क्या इक दिन और बढ़ाने का
कर सकते हो कभी गुरूर
मुझे देखो अस‌म्भव को भी
सम्भव कर जाते हैं हुजूर ।
भले ही चार साल है लगता
पर इंक दिन और बढ़ता ज़रूर ़
अलग र‌‌गं औरअलग ढंग से
इस माह बीतता प्रेम सप्ताह ,
इज़हारे इश्क का हाल देख के
मेरे दिल से बस निकले आह ।
पहले दिन ही ग़ुलाब दे कर
कांटों से भी करता प्यार ,
अगले दिन ही प्रपोज करता
कहता प्रीत से ना करना इंकार।
तीसरे दिन चाकलेट खिलाता
चौथा दिन टेडी बीयर का उपहार
पांचवां दिन प्रामिस देने लेने में
बन्दा हो जाता है कामयाब।
छठे दिन बस मिलन आलिंगन
सातवे दिन बरसे चुम्बन बौछार।
मनाने जयंती दिवस वेलेन्टाइन
प्रेम जताते बीतता अंतिम दिन।
फ़रवरी को आइना दिखाने से
मैं भी कभी आई ना बाज
दिन सप्ताह माह का नहीं मोहताज
प्रेम असीम है,सास्वत, सरताज
क्यूं करती हो खुद पे नाज़
फ़रवरी तेरा गलत अंदाज।।