फागुन का महीना – किरण बाला

तज मलिन मन, सब संताप ह्रदय केनव उमंग भर, पुलकित उर कर ले नवयौवना प्रकृति संग,स्फूर्ति संचित कर लेप्रेम राग में हो रत, प्रेम धुन झंकृत कर ले
फागुन का महीना आया हैसौगात प्रेम की वो लाया है
गेहूँ जौ की बाली संग, ले रही पवन नित हिलोरसरसों टेसू के संग रंग, निखर उठी अनुपम अंजोरहर्षाए कृषक मग्न मन, लद गईं आमों पर अब बौरपीली-हरी चुनर में रंग, हुई वसुधा आनंद-विभोर
फागुन का महीना आया है कण-कण धरा का लहलहाया है
उत्सव-श्रृंखला का शुभारंभ, सुखद अनुभूति कर लेरंगोत्सव लाया प्रेम रंग, ह्रदय से इनका वरण कर लेअबीर-गुलाल की बौछार संग, तन-मन अपना रंग लेकलह-कुंठा द्वेष तज, मैत्री-प्रेम का अनुबंध कर ले
फागुन का महीना आया हैसंदेश सद्बभाव का लाया है