बंगाल कांग्रेस ने दिया चुनाव जीतने का मंत्र, वाम दलों से गठबंधन की वकालत

पश्चिम बंगाल की कांग्रेस इकाई ने पार्टी हाईकमान से कहा है कि राज्य में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल कांग्रेस से गठबंधन न किया जाए. पार्टी ने 21 सुझावों के साथ अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी को भेजी एक रिपोर्ट में बताया है कि बंगाल में ‘बीजेपी-टीएमसी की सांठगांठ’ को कैसे शिकस्त दिया जाए. इस रिपोर्ट में वामपंथी दलों के साथ गठबंधन करने और एक साझा दफ्तर बनाने का सुझाव दिया गया है.

अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक 13 जून को कांग्रेस आलाकमान को रिपोर्ट भेजने वाले पश्चिम बंगाल कांग्रेस के महासचिव ओपी मिश्रा ने बताया, ‘हमने पार्टी नेतृत्व के पास यह रिपोर्ट भेज दी है. हमें उनके जवाब का इंतजार है. रिपोर्ट में सिर्फ 2019 चुनाव पर ही जोर नहीं दिया गया है बल्कि यह भी बताया गया है कि 2021 में तृणमूल कांग्रेस को कैसे हरा कर सत्ता हासिल कर सकते हैं. हम राज्य में माकपा के साथ गठबंधन में सरकार बनाने के खिलाफ नहीं हैं.’

बता दें कि पिछले महीने पश्चिम बंगाल कांग्रेस के अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी ने कहा था कि उनकी पार्टी का इरादा गैर तृणमूल-बीजेपी दलों के सात गठबंधन करने का है. उन्होंने कहा कि इस संबंध में कांग्रेस के सभी विधायकों और जिला स्तर के सभी पार्टी नेताओं से विचार-विमर्श के बाद लिया जाएगा. साथ ही उन्होंने बताया कि ओपी मिश्रा को इस सिलसिले में खाका तैयार करने को कहा गया है.

कांग्रेस आलाकमान को दिल्ली भेजे गए 21 सुझावों में यह भी कहा गया है कि कोलकाता, आसनसोल, बहरामपुर, सिलीगुड़ी जैसे जिलों में केंद्रीय कार्यालय खोलने का जिक्र किया गया है. साथ ही राजनीतिक मोर्चे के लिए फेसबुक पेज, ट्विटर हैंडल, 50 हजार स्वयंसेवक तैयार करने की सलाह दी गई है. इन सभी सुझावों पर अक्टूबर तक अमल करने को कहा गया है.

रिपोर्ट में पार्टी के लिए राजनीतिक कार्यकर्ताओं को किस तरह तैयार किया जाए इसका सुझाव भी दिया गया है. पार्टी स्वयंसेवकों का विवरण केंद्रीय कार्यालय में रखने और इसे गठबंधन दलों को मुहैया कराने को कहा गया है. इसके अलावा मानवाधिकार हनन के मुद्दों पर सक्रिय रहने और प्रचार प्रसार के तौर तरीकों का सुझाव दिया गया है.

बंगाल कांग्रेस का मानना है कि तृणमूल कांग्रेस ने कई मसलों पर चुप्पी साधकर अप्रत्यक्ष तरीके से बीजेपी का साथ दिया है. कई अहम मुद्दों पर ममता बनर्जी की पार्टी ने विपक्ष का साथ नहीं दिया. हाल के दिनों में देखा गया है कि तृणमूल ने विपक्षी एकता को कमजोर करने की भी कोशिश की है. यह अप्रत्यक्ष रूप से 2019 के लोकसभा चुनावों में बीजेपी को फायदा पहुंचाने की कोशिश है.