बजरंग लाल सैनी  – देश,नागरिक – साप्ताहिक प्रतियोगिता

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आजादी का गान कहूँ, शहीदों का मान कहूँ,
तिरंगे का सम्मान कहूँ, भारत हमारा है।
नित उठ पूजा करूँ, भारत का ध्यान धरूँ,
चरण वन्दन करूँ, ये सबका प्यारा है।
राष्ट्र हित सब सहूँ, राष्ट्र पथ पर रहूँ,
इसकी गाथा मैं कहूँ, सबका दुलारा है।
शीश मैं अर्पित करूँ, जीवन अर्पित करूँ,
पूर्ण समर्पण करूँ, जग का सहारा है।1

तन मन धन वारूँ, निज जीवन संवारूँ,
जीवन प्राण उवारूँ, मेरा देश महान।
इस पर न्योछावर, जग-जीवन औ घर,
पूर्ण समर्पण कर, स्वर्ग से भी महान।
बात करूँ सम्मान की, सुरक्षा अभिमान की,
देश के स्वाभिमान की, कहे वेद पुराण।
गांधी सुभाष का देश, सद्भाव का परिवेश,
केसरिया गणवेश, मेरा देश महान।2

तत्त्व का सकल ज्ञान, सर्वधर्म का सम्मान,
अध्यात्म से पहचान, मेरा देश महान।
आजादी का रखवाला, चरित्र का मतवाला,
उज्ज्वल संस्कृति वाला, मेरा देश महान।
गणतंत्र का पोषक, मनुजता का रक्षक,
समता का उद्घोषक, संविधान प्रमाण।
ज्ञान-विज्ञान का दाता, अहिंसा-त्याग का धाता,
इस सृष्टि का विधाता, प्रमाण वेद-पुराण। 3

मन मोहक संस्कृति, नहीं जिसमें विकृति,
करती गान प्रकृति, देव धरते ध्यान।
उल्लास वातावरण, प्रकृति करे पोषण,
नहीं है कोई शोषण, सबको मिले मान।
देव यहाँ विचरते, धरती पर बसते ,
सकल जीव मग्न हो, करते गुणगान।
प्रताप शिवा से बेटे, भीष्म शरशय्या लेटे,
स्वाभिमान को बचाने , सहर्ष त्यागे प्राण।


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