बजरंग लाल सैनी – पति-पत्नी – साप्ताहिक प्रतियोगिता

जीवन में रसधार है पति, पत्नी जीवन का आधार, सद्भावना का हार है पति, पत्नी आनंद का पारावार, कर्तव्य का गुरु भार है पति, पत्नी निर्मल प्रेम का पारावार, सुनहरे जज्बातों का लेख है पति, पत्नी लेख का जीवंत किरदार, सहयोग और सुख का पोषक है पति, पत्नी समर्पण और त्याग का पावन विचार, जीवन राह का हमराह है पति, पत्नी राह की बाधाओं पर प्रहार, हर सुख-दुःख का साथी है पति, पत्नी का कभी न कम होता प्यार, सिर्फ घर का निर्माण करता है पति, पत्नी बनाती है उसे सुन्दर परिवार, जीवन में रसधार है पति, पत्नी जीवन का आधार, दोनों बने हैं एक दूसरे के लिए, करने जीवन-सागर में उन्मुक्त विहार, कहता “वज्रघन” यों अपनी मति, पति-पत्नी का प्रेम ज्यों मीन-पारावार।