बिना सैलरी नौकरी करते थे राधाकृष्णन, ये बातें बनाती हैं खास

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आज आजाद भारत के पहले उप-राष्ट्रपति और दूसरे राष्ट्रपति दिग्गज शिक्षाविद् सर्वपल्ली राधाकृष्‍णन की पुण्यतिथि है. साल 1975 में आज ही के दिन लंबी बीमारी की वजह से उनका निधन हो गया था. उन्हें दुनिया में सर्वश्रेष्ठ शिक्षकों में से एक माना जाता था और वो कहते थे कि सर्वपल्ली कहते थे कि अच्छा टीचर वो है, जो ताउम्र सीखता रहता है और अपने छात्रों से सीखने में भी कोई परहेज नहीं दिखाता.

डॉ. राधाकृष्णन का जन्म 5 सितंबर, 1888 को तमिलनाडु के तिरुतनी ग्राम में हुआ था. इनके पिता सर्वपल्ली वीरास्वामी राजस्व विभाग में काम करते थे. इनकी माता का नाम सीतम्मा था. इनकी प्रारंभिक शिक्षा लूनर्थ मिशनरी स्कूल, तिरुपति और वेल्लूर में हुई. इसके बाद उन्होंने मद्रास क्रिश्चियन कॉलेज में पढ़ाई की. 1903 में युवती सिवाकामू के साथ उनका विवाह हुआ.

महान शिक्षाविद राधाकृष्ण ने 12 साल की उम्र में ही बाइबिल और स्वामी विवेकानंद के दर्शन का अध्ययन कर लिया था. उन्होंने दर्शन शास्त्र से एम.ए. किया और 1916 में मद्रास रेजीडेंसी कॉलेज में सहायक अध्यापक के तौर पर उनकी नियुक्ति हुई. उन्होंने 40 सालों तक शिक्षक के रूप में काम किया.

वे 1931 से 1936 तक आंध्र विश्वविद्यालय के कुलपति रहे. हालांकि उन्होंने बतौर कुलपति सैलरी भी नहीं ली थी. इसके बाद 1936 से 1952 तक ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में प्राध्यापक के पद पर रहे और 1939 से 1948 तक वह काशी हिंदू विश्वविद्यालय के कुलपति पद पर आसीन रहे. उन्होंने भारतीय संस्कृति का गहन अध्ययन किया.

 वर्ष 1952 में उन्हें भारत का प्रथम उपराष्ट्रपति बनाया गया और भारत के द्वितीय राष्ट्रपति बनने से पहले 1953 से 1962 तक वह दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति थे. इसी बीच 1954 में भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने उन्हें ‘भारत रत्न’ की उपाधि से सम्मानित किया. डॉ. राधाकृष्णन को ब्रिटिश शासनकाल में ‘सर’ की उपाधि भी दी गई थी. इसके अलावा 1961 में इन्हें जर्मनी के पुस्तक प्रकाशन द्वारा ‘विश्व शांति पुरस्कार’ से भी सम्मानित किया गया था.

डॉ. राधाकृष्णन ने 1962 में भारत के सर्वोच्च, राष्ट्रपति पद को सुशोभित किया. उन्होंने भारत ने पहले उप राष्‍ट्रपति के तौर पर 1952 से 1962 तक अपने दो कार्यकाल पूरे किए. इसके बाद 1962 से 1967 तक उन्‍होंने दूसरे राष्‍ट्रपति के तौर पर देश की बागडोर संभाली. उन्होंने गौतम बुद्धा, जीवन और दर्शन, धर्म और समाज, भारत और विश्व आदि पर किताबें भी लिखीं.


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